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LoC Report: अंगुलियां मशीनगन और नजरें दुश्मन के नापाक हरकत पर, आखिरी बंकर में तैनात जवानों के हौसले की कहानी

Sat, 29 Oct 2022 10:55 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, पुंछ

सार

एलओसी पर समुद्र तल से दस हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर सेना की आखिरी चौकी पर तैनात जवानों का जोश मनोबल काफी सशक्त है। बुलंद हौसले के साथ वह बंकर में लगातार डटे हुए हैं। उनकी नजर सीमापार से होने वाली नापाक हरकत पर लगी रहती है। 
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पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर अखिरी बंकर में दुश्मन पर नजरें गड़ाए सेना के जवान। - फोटो : POONCH
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विस्तार
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जब देश के लिए निकले हैं तो हालात और परिस्थितियां कैसी भी हों सुरक्षा तो करनी ही है। यह कहना है पुंछ जिले में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर समुद्र तल से दस हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर सेना की आखिरी चौकी पर बंकर में तैनात जवान रछपाल सिंह का।

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नियंत्रण रेखा पर आखिरी बंकर पर तैनात जवानों के मनोबल और उनके हौसले के बारे में जाना तो जवानों ने अपने ख्यालों का इस तरह इजहार किया। पाकिस्तानी सेना की चौकी से महज 50 मीटर की दूरी पर तैनात सेना के इन जवानों का मनोबल काफी सशक्त है।

हौसले बुलंद हैं, यह जवान दिन रात ड्यूटी पर डटे हैं। नियंत्रण रेखा पर पहाड़ की चोटी पर चट्टान को काट कर कई मीटर नीचे भूमिगत बनाए गए बंकर में ड्यूटी पर तैनात रहने वाले जवानों की उंगलियां हमेशा अपने अत्याधुनिक हथियारों, यूनिवर्सल मशीनगनों एवं स्नाइपरों के ट्रिगर पर रहती है।
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इसके अलावा बंकर में बने छोटे से झरोखे से बाहर निकली इन हथियारों की नाल से नजरें सामने दुश्मन की चौकी की तरफ गड़ी रहती है कि कहीं दुश्मन की तरफ से कोई नापाक हरकत न करे। सीमापार से पाकिस्तानी सेना के सहयोग से आतंकी लगातार घुसपैठ का प्रयास करते हैं।

उसको नाकाम किस तरीके से करें यह जवान बखूबी जानते हैं। आखिरी बंकर में तैनात सेना के इन जवानों का कहना है कि जिन दिनों कोई त्योहार अथवा पर्व होता है, तो पाकिस्तान की तरफ से नापाक हरकत में बढ़ोतरी कर दी जाती है।

ऐसे में हम पूरी तरह से मुस्तैद रहते हैं। ताकि दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए। उसकी हरकत को नाकाम बनाया जाए। इन जवानों का यह भी कहना है कि समुद्र तल से दस हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां हमारे सामने चुनौतियां अधिक हैं।

दुश्मन की चौकियों के करीब होने के कारण हर समय चौकस रहना पड़ता है। उस पर यहां ठंड भी बहुत होती है। पलक झपकते ही मौसम बदल जाता है। हर तरफ बादल छा जाते हैं। ऐसे में आंखों से कम दिखाई देता है।

लेकिन ऐसे समय के लिए दुश्मन पर नजर रखने और उसकी नापाक हरकत का जवाब देने के लिए हमारे पास आधुनिक हथियारों के साथ आधुनिक उपकरण भी हैं। जो हमें और भी अधिक सशक्त बनाते हैं। ड्यूटी के दौरान हमारे सामने केवल एक ही लक्ष्य है कि किसी भी कीमत पर दुश्मन की नापाक हरकत को सफल नहीं होने देना।

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