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ऐसे कर्म करें कि लोग मरने के बाद भी अच्छाई के लिए याद करें : श्री हरि चैतन्य महाप्रभु

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अखनूर के जियापोता घाट पर आयोजित हुआ धार्मिक समागम
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संवाद न्यूज एजेंसी
अखनूर। श्री हरि कृपा पीठाधीश्वर एवं विश्वविख्यात संत स्वामी श्री हरि चैतन्य पुरी जी महाराज ने शनिवार को जियापोता घाट में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में उपस्थित भक्त समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में ऐसे कर्म करने चाहिए कि व्यक्ति के जाने के बाद भी लोग उसकी अच्छाई के लिए उसे याद करें। धन-संपत्ति से अधिक मनुष्य को अपने गुणों और संस्कारों का संग्रह करना चाहिए।

प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने कहा कि देश में अनाचार, अत्याचार, भ्रष्टाचार, घृणा और विद्वेष का वातावरण चिंता का विषय है। आज मनुष्य ने अधिक से अधिक भौतिक सुख-सुविधाएं प्राप्त करना ही जीवन का लक्ष्य बना लिया है, जबकि मानवता, नैतिकता और चरित्र का निरंतर ह्रास हो रहा है। उन्होंने कहा कि धर्म, अध्यात्म और परमात्मा की शरण ही मनुष्य को इस स्थिति से बाहर निकाल सकती है।
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उन्होंने कहा कि राम, रहीम, नानक, बुद्ध और महावीर की धरती भारत को संकीर्णताओं से ऊपर उठकर राष्ट्र और समाज हित में कार्य करने की आवश्यकता है। ऊंच-नीच और भेदभाव को अनुचित बताते हुए उन्होंने सभी से मिल-जुलकर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी धर्म मानव को सही दिशा दिखाते हैं।

श्री हरि चैतन्य महाप्रभु ने कहा कि मनुष्य को बोलने से पहले विचार करना चाहिए। ऐसा कोई शब्द नहीं बोलना चाहिए जिससे किसी के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचे, दिल दुखे या प्रेम, एकता और सद्भाव प्रभावित हो। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य का मस्तिष्क तो विशाल होता जा रहा है, लेकिन हृदय सिकुड़ता जा रहा है। जीवन में अहंकार और अकड़ के बजाय विनम्रता तथा उदारता होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्वयं जागने के साथ दूसरों को भी जागरूक करना और अपने कल्याण के साथ समाज के कल्याण में योगदान देना ही जीवन की सार्थकता है। दुश्मन को हराने वाले से महान वह है जो उसे अपना बना ले। उन्होंने कहा कि कठिनाइयों और बाधाओं से घबराए बिना लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहना चाहिए।

प्रवचनों के दौरान भक्तजन भाव-विभोर हो उठे और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दौरान श्री गुरु महाराज, कामां के कन्हैया और लाठी वाले भैया के जयकारों से जियापोता घाट गूंज उठा। स्थानीय क्षेत्र के अलावा दूरदराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
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इससे पहले श्री महाराज जी ने प्रातःकाल से पहाड़ी मार्गों, दलहौड़ी, राजौरी, सुंदरबनी तथा अखनूर के विभिन्न स्थानों का दौरा किया। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने उनका भव्य स्वागत किया।
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