पुंछ। शहर में लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया, लेकिन पारंपरिक लोक गीत सुंदर मुंदरिए तेरा कौन बिचारा, दुल्ला भट्टीवाला...आज सुनाई नहीं दे रहा। दो दशक पहले बच्चे और युवा ये गीत गाते हुए घरों में जाते थे और लोहड़ी मांगते थे।
सुनील कुमार, हरपाल सिंह, सचिन कुमार, हरदेव सिंह आदि का कहना है कि आज के बच्चे तो केवल मोबाइल में ही व्यस्त रहते हैं। बचपन में हम लोग तो दिसंबर से ही लोहड़ी मांगने का क्रम शुरू कर देते थे। स्कूल में खाली समय यार दोस्त मिल कर शाम को किस मोहल्ले में लोहड़ी मांगनी है, उसका कार्यक्रम बना लेते थे। इससे जो पैसे मिलते थे, उससे हम मूंगफली, रेवड़ी, गजक खरीदकर मोहल्ले में पर्व मनाते थे।