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Ground Zero : 1971 में भी नहीं देखी थी ऐसी गोलाबारी...पुंछ में सुरक्षित ठिकानों पर भेजे जा रहे नागरिक

Thu, 08 May 2025 05:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, पुंछ

सार

पाकिस्तानी सैनिकों ने गुरुवार को लगातार दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर सीमा पार से गोलाबारी की। इससे एक दिन पहले भारतीय सशस्त्र बलों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पड़ोसी देश में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था।
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फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन सीमाई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने पुंछ के रिहायशी इलाकों पर जमकर गोले दागे। इसमें चार बच्चों समेत 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि 57 से ज्यादा घायल हैं। सीमा पार से करीब 14 घंटे तक चली गोलाबारी से लोगों में जबरदस्त अफरा-तफरी का माहौल है। पुंछ, अखनूर और राजोरी के लोगों का कहना है कि उन्होंने ऐसी गोलाबारी पहले कभी नहीं देखी। 

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हालात देखते हुए पुंछ के ज्यादातर लोगों को सुरक्षित ठिकानों की ओर भेजा जा रहा है। पाकिस्तान की तरफ से पिछले कई दिन से सीमा पर गोलाबारी की जा रही थी। मंगलवार देर रात भी उसने अपनी हरकत जारी रखी। भारतीय सेना भी उसकी गोलाबारी का माकूल जवाब दे रही थी, लेकिन तड़के करीब पौने तीन बजे पाकिस्तान ने रुख पलटते हुए पुंछ शहर पर गोले बरसाने शुरू कर कर दिए। 

लोग उस वक्त गहरी नींद में थे, जिस घर पर गोला पड़ा, वहां रहने वाले लोगों को संभलने का भी मौका नहीं मिला। घरों के साथ ही मंदिर, गुरुद्वारों के पास भी गोले पड़े। पाकिस्तानी गोलाबारी में पहली मौत सुबह करीब छह बजे हुई, जब डुंगस में एक घर की छत पर पाकिस्तान की तरफ से दागा गया गोला आकर गिरा। इससे यहां घर में सो रहे दो बच्चों की मौत हो गई। ये दोनों भाई बहन थे। पुंछ में एक बच्चे की मौत उस वक्त हो गई, जब उसका परिवार जम्मू के लिए पलायन कर रहा था। 
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पुंछ से करीब पांच किमी दूर उनकी गाड़ी पर एक गोला गिरा। इसमें परिवार के पांच लोग घायल भी हुए हैं। पुंछ जिला अस्पताल से महज 50 मीटर दूर रहने वाले अमरजीत सिंह घर से निकलते ही पाकिस्तान की तरफ से गिराए गए गोले की जद में आ गए। इससे एक्स सर्विसमैन अमरजीत सिंह की जान चली गई। घबराए हुए लोगों का कहना था कि उन्होंने ऐसी गोलाबारी पहले कभी नहीं देखी। 1971 और 1965 के युद्ध में भी नहीं। लेकिन, इस बार हालात एकदम अलग हैं। पुंछ के काजी मोहल्ला वार्ड-1 से लेकर वार्ड-10 तक में पाकिस्तानी गोलाबारी के निशान देखे जा सकते हैं।

एजेंसियों ने निगरानी बढ़ाई 
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन सीमाई इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने लोगों से संयम बनाए रखने और अफवाहों से बचने की अपील की गई है। स्थानीय प्रशासन ने हालात को देखते हुए दिनभर उच्चस्तरीय बैठकें की। बॉर्डर से सटे गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं।

ऑपरेशन के साथ बढ़ी बेचैनी
अखनूर। सीमा पर अचानक बढ़े तनाव के बाद अखनूर क्षेत्र में मंगलवार रात से ही हलचल तेज हो गई। भले ही सीमा पर हालात सामान्य बने रहे, लेकिन जैसे ही ऑपरेशन सिंदूर की खबरें सामने आईं, लोगों में बेचैनी फैल गई और पूरा क्षेत्र अलर्ट मोड में चला गया।

मंगलवार देर रात जैसे ही सीमा पार भारतीय सेना के स्ट्राइक की खबरें फैलीं, अखनूर उपजिला अस्पताल के स्टाफ को अलर्ट कर दिया गया। स्थानीय लोगों ने घरों की बत्तियां और गलियों की स्ट्रीट लाइटें बुझा दीं, ताकि किसी भी आपातस्थिति में सतर्क रहा जा सके। बुधवार सुबह होते ही टीवी, सोशल मीडिया और अखबारों से लोगों को ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी मिली। 

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हालांकि, क्षेत्र के बाजार खुले रहे, पर आम दिनों की तरह चहल-पहल नहीं थी। दुकानों पर सन्नाटा छाया रहा। बसें और मिनी बसें सड़कों से नदारद रहीं। अधिकतर लोग बेहद जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। बुधवार को क्षेत्र के स्कूल-कॉलेज भी बंद रहे।  

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