पुंछ। देश की रक्षा और पुंछ को भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए 1947 में देश के बंटवारे के बाद कबायलियों और पाकिस्तानी सेना से संघर्ष करते हुए प्राणों का बलिदान देने वाले पुंछ के 146 जवानों को सोमवार को सेना और अवाम ने श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर सेना की दुर्गा बटालियन की तरफ से शहीद स्मारक देरियां पर कार्यक्रम किया गया। इसमें 93 इन्फैंट्री ब्रिगेड कमांडर ब्रिगेडियर राजेश बिष्ट की अगुवाई में अधिकारियों और नागरिकों ने भाग लिया।
ब्रिगेड कमांडर और अन्य अधिकारियों ने मातमी धुन पर शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित करते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों एवं पूर्व सैनिकों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूर्व सैनिक और 1947 के चश्मदीद पुरुषोत्तम लाल ने बताया कि देश के बंटवारे के समय तक पुंछ स्वायत्त राज्य था, यहां राजा मोती सिंह का राज था। उनकी सेना की चार बटालियन सीमा की रक्षा में तैनात थीं। बंटवारा होते ही आज के पीओके जो पुंछ का भाग था, वहां कबायलियों और पाकिस्तानी सेना ने हमला शुरू कर दिया। इसके चलते लोग जान बचा कर भाग कर पुंछ आने लगे थे। कबायलियों के सहयोग से पाकिस्तानी सेना ने पुंछ राज्य के अधिकतर हिस्से पर कब्जा कर लिया और वर्तमान पुंछ नगर जोकि राज्य की राजधानी थी, उसे छोड़कर सब तरफ कबायली और पाकिस्तानी सेना मौजूद थी। यहां इस देरियां में पुंछ को पाकिस्तान के कब्जे से बचाने के लिए राजा की सेना के इन 146 वीरों ने बलिदान देते हुए दुश्मन को नगर में प्रवेश नहीं करने दिया।
उसके उपरांत कश्मीर के उड़ी के रास्ते ब्रिगेडियर प्रीतम सिंह सेना के साथ पुंछ पहुंचे, और एक वर्ष के संघर्ष के बाद दुश्मन को खदेड़ कर भगाया। इन शहीदों के बलिदान से उस समय पुंछ नगर में मौजूद अस्सी हजार विस्थापितों के साथ ही पुंछ के दस हजार निवासियों की जान बची और पुंछ नगर पाकिस्तान के कब्जे से जाने से बच गया था।