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पुलवामा के 40 दिव्यांगों के दल ने किया पुंछ राजोरी का दोरा, ऐतिहासिक एंव धार्मिक स्थलों को देख हुए प्रसंन

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पुंछ दोरे के दोरान सांई मीरा जियारत पर पुलवामा से आए दिव्यांग एंव जियारत कमेटी के सदस्य - फोटो : POONCH
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पुंछ। पुलवामा के 40 दिव्यांगों के एक दल ने पुंछ एवं राजोरी का दौरा किया। मंगलवार दोपहर बाद वह खुशी-खुशी अपने घरों को लौट गए। दौरे के दौरान पुलवामा के इन दिव्यांगों ने जियारत शाहदरा शरीफ का दौरा कर रात गुजारी। वहां से लौटते हुए देहरा गली के प्राकृतिक नजारों का आनंद उठाया। इसके बाद पुंछ में उन्होंने धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों सांई मीरां बख्श की जियारत, डेरा संतपुरा नंगाली साहब, श्री दशनामी अखाड़ा मंदिर, बाग डियोडी और पुंछ किले को देखा। उसके साथ ही पुलस्त नदी किनारे से नगर एवं आसपास के क्षेत्र का अवलोकन किया। इसके उपरांत वह खुशी-खुशी घरों को लौट गए। पुलवामा के दिव्यांगों के इस दौरे का पीर पंजाल अवामी सुनवाई संगठन के चेयरमैन और दिव्यांग फोरम के प्रमुख मोहम्मद फरीद मलिक ने उनका स्वागत किया। उनको साथ लेकर सभी जगह का दौरा कराया। पुंछ से लौटते हुए पुलवामा के दिव्यांगों शबनम आफताब, फारूक अहमद, जावेद अहमद और गुलाम हसन पंडित चेयरमैन पुलवामा हैंडिकैप एसोसिएशन का कहना है कि हम उपायुक्त बसीर उल हक चौधरी के आभारी हैं, जिन्होंने हमारे लिए इस प्रकार पुंछ-राजोरी के दौरे की व्यवस्था की, और हम लोगों को यहां भेजा। हमें यहां आकर बहुत अच्छा लगा यह इलाका काफी सुंदर है, यहां ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी मनोहर हैं। अब कम से कम हम भी अपने क्षेेत्र के लोगों से यह कह सकते हैं कि हमने भी पुंछ-राजोरी को देखा है।गुलाम हसन पंडित का कहना हैकि कश्मीर में दिव्यांगों को खेल के लिए भी काफी अवसर प्रदान किए जाते हैं। जो शायद पुंछ में नहीं प्रदान किए जाते हैं। यहां के दिव्यांगों को भी खेलकूद एवं अन्य गतिविधियों में भाग लेने के लिए सहयोग करना चाहिए, ताकि यहां के दिव्यांग घरों में रहकर मानसिक तनाव का शिकार होने के बजाए आगे बढ़ सकें।
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