पुंछ के श्रीदशनामी अखाडा मंदिर में पूर्व महंत स्वामी शंकरानंद पुरी जी की 51वीं बरसी पर आयोजित भंड?
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पुंछ। नगर स्थित सभी समुदायों की आस्था के केंद्र राजगुरु गद्दी दशनामी अखाड़ा मंदिर के पूर्व महंत 1008 स्वामी शंकरानंद पुरी जी महाराज की 51 वीं पुण्यतिथि बड़ी श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर मंदिर समिति की तरफ से कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों को प्राथमिकता देते हुए लोक कल्याण के लिए यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दिन भर मंदिर में भजन कीर्तन एवं प्रवचन का कार्यक्रम जारी रहा।
शनिवार सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के आने जाने का क्रम शुरू हो गया। इस बीच सुबह 8.30 बजे मंदिर में दो दिन से चल रहे श्रीरामायण के अखंड पाठ का भोग डाला गया। इसके बाद मंदिर समिति के प्रधान बसंत राम शर्मा की अगुवाई में पूर्व महंत 1008 स्वामी शंकरानंद पुरी की समाधि के पास लोक कल्याण की कामना को लेकर यज्ञ शुरू किया गया। इसमें मंदिर समिति के सदस्यों के अलावा बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। दोपहर करीब 1 बजे यज्ञ की पूर्णाहूति डाली गई। इसके बाद मंदिर में यज्ञ शुरू हुआ। इसमें सभी समुदाय के हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर के प्रधान बसंत राम शर्मा ने बताया कि सदियों पुराने इस श्री दशनामी अखाड़ा मंदिर की गद्दी पर विराजमान होने वाले महंतों को पुुंछ राज्य के राजगुरु का पद प्राप्त होता था। मंदिर की स्थापना के बाद से आज तक इसे राजगुरु गद्दी दशनामी अखाड़ा कहा जाता है। यहां बडे़-बड़े संत महात्माओं ने गद्दी पर बैठ कर लोगों की सेवा करते हुए उन्हें धर्ममार्ग पर चलाया है। क्षेत्र में आज तक भाईचारा बना हुआ है।
वर्तमान महंत 1008 स्वामी विश्वात्मां नंद सरस्वती जी से पहले इस गद्दी पर विराजमान महंत 1008 स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने करीब 21 वर्ष तक लोगों को धर्म मार्ग पर चलाया था। जबकि उनके पूर्व योगीराज 1008 स्वामी शंकरानंद जी पुरी जिन्हें लोग बंगाली बाबा भी कहते थे, उन्होंने करीब पांच दशक तक इस गद्दी पर विराजमान रहते हुए लोगों का मार्ग दर्शन किया। उनके पास सभी धर्मों के मानने वाले लोग बेझिझक आते थे और स्वामी जी सभी को सदमार्ग दिखाते थे। स्वामी जी ने करीब 51 वर्ष पूर्व आज ही के दिन इस संसार को छोड़ स्वार्गारोहन किया था।