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बंकर नहीं बनने से नाराज हैं करमाड़ा के ग्रामीण

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पुंछ। केंद्र सरकार की तरफ से एलओसी के लोगों को बंकर की सुविधा देने का वादा पूरा नहीं हो पाने से नियंत्रण रेखा से सटे इलाकों के लोगों में खासा रोष है। पिछले कई दिनों से पाकिस्तान पुंछ जिले के करमाड़ा इलाके में गोलाबारी कर रहा है। यहां बंकर की सुविधा नहीं मिलने से जैसे ही गोलाबारी शुरू होती है, लोग अपने घरों में छुप कर अपनी जान बचाते हैं। करमाड़ा के लोगों ने पाकिस्तानी गोलाबारी की स्थिति में उनके लिए सुरक्षित स्थान पर रहने का इंतजाम करने की मांग की है।
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गौरतलब है कि पिछले सात-आठ दिनों से पाकिस्तानी सेना द्वारा गांव में लोगों के घरों और खेतों को निशाना बना कर की जा रही गोलाबारी से जान जाने का खतरा बनने से करमाड़ा के लोगों में भारी निराशा है। लोगों का कहना हैकि या तो सरकार हमारे गांव में बंकरों का निर्माण करवाया नहीं तो हमारा कहीं और रहने का बंदोबस्त करे, क्योंकि पाकिस्तान की इस गोलाबारी में हमारे पक्के मकान हमें नहीं बचा सकते हैं। गांव निवासियों मोहम्मद लतीफ व मोहम्मद अकरम का कहना है कि करीब पांच हजार की जनसंख्या वाले इस गांव में आज तक एक भी बंकर नहीं बन पाया है। ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने खबरों में पढ़ा था कि नियंत्रण रेखा के गांवों में बंकर बनाए जा रहे हैं, लेकिन ये बंकर कहां बनाए जा रहे हैं, इसका उनको भी पता नहीं है। पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी से बचने के लिए उनके घर ही बंकर का काम कर रहे हैं।
गौरतलब है कि जिले में केंद्र सरकार की तरफ से नियंत्रण रेखा के आसपास बसने वाले लोगों के लिए 1320 निजी बंकर और 688 सामुदायिक बंकर बनाने के लिए फंड जारी किया गया था, लेकिन जिले में अभी तक महज 22-25 सामुदायिक बंकरों का ही निर्माण कराया जा सका है। एक भी निजी बंकर नहीं बनाया गया है। इस कारण नियंत्रण रेखा पर स्थित करमाड़ा सहित अन्य गांव के लोगों को जान बचाने के लिए घरों में ही छुपना पड़ता है। पाकिस्तानी सेना जब मोर्टार दागती है तो उनके घर भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
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