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अब पाकिस्तानी गोलाबारी में भी सुरक्षित रहेंगे हायर स्कैंडरी स्कूल सावजियां के विद्यार्थी और शिक्षक

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पुंछ जिले के भारत पाक नियंत्रण रेखा पर स्थित सावजियां के स्कूल में बन रहे बंकर को दिखाते प्रिंसीप - फोटो : POONCH
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पुंछ। जिले में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तानी चौकियों से मात्र आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी और शिक्षक अब आने वाले दिनों में पाकिस्तानी सेना की तरफ से की जाने वाली गोलाबारी में भी स्कूल में सुरक्षित रह सकेंगे। गोलाबारी शुरू होते ही उनमें किसी प्रकार का हड़कंप अथवा अफरा-तफरी नहीं होगी।
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इसका कारण यह है कि हायर सेकेंडरी स्कूल सावजियां जिले का पहला ऐसा सरकारी स्कूल है जहां इन दिनों केंद्र सरकार की तरफ से नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों के लिए मंजूर सामुदायिक बंकर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। स्कूल में बंकर निर्माण कराए जाने से न सिर्फ स्कूल के शिक्षक, छात्र-छात्राएं ही खुश हैं, बल्कि गांव के लोग भी काफी खुश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब भी पाकिस्तानी सेना की तरफ से सावजियां में गोलाबारी शुरू की जाती थी तो स्कूल में मौजूद हमारे बच्चों अफरा-तफरी मच जाती थी। वहीं हम भी बच्चों को स्कूल से लाने के लिए भाग पड़ते थे। इसके चलते कई बार गांव के लोग घायल हो जाते थे। अब यह बंकर बन जाएगा तो कम से कम हम लोग भी घरों में सुरक्षित रह सकेंगे और बच्चे स्कूल में सुरक्षित रहेंगे।
हायर सेकेंडरी स्कूल सावजियां के प्रधानाचार्य अनवार खान स्कूल में बंकर बनने से काफी खुश हैं। उनका कहना है कि मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल सावजियां जिले का पहला ऐसा सरकारी स्कूल है। जहां इतना बड़ा सामुदायिक बंकर बनाया जा रहा है। इसके लिए मैं उपायुक्त राहुल यादव और कें द्र सरकार का आभारी हूं। केंद्र सरकार ने नियंत्रण रेखा के आसपास बंकर निर्माण की योजना बनाई है। उपायुक्त ने मेरे एक आवेदन पर स्कूल में बंकर निर्माण की मंजूरी देने के साथ ही सड़क एवं भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों से काम भी शुरू कराया और आज बंकर की छत का लेंटर डाला जा चुका है। अगले 15-20 दिन में बंकर का निर्माण काम पूरा हो जाएगाद्घ उसमें बिजली की फिटिंग और शौचालय भी बन जाएगा, तो हमारे स्कूल के 250 के करीब छात्र-छात्राएं और 50 के करीब स्टाफ के लोग गोलाबारी के दौरान बंकर में पनाह ले सकेंगे।
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अन्य स्कूलों में भी बनाए जाएं बंकर
पाकिस्तानी गोलाबारी के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर परेशानी होती थी। क्योंकि स्कूल के साथ लगती पहाड़ी पर पाकिस्तानी सेना की चौकियां हैं। जहां से मोर्टार तो मोर्टार बंदूक की गोलियां भी आकर लगती हैं और टीन की छत वाले इस स्कूल में गोलाबारी से किसी भी प्रकार की कोई सुरक्षा नहीं हो सकती थी। बच्चे भी डर कर घरों की तरफ भागने का प्रयास करते थे। गोलाबारी के बाद कई बार स्कूल दस दिन तक बंद रहता था। इससे बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित होती थी। ऐसे में अब बंकर बनने से गोलाबारी शुरू होने बच्चों को बंकर में पहुंचा दिया जाएगा। इस प्रकार जिले में नियंत्रण रेखा के आसपास के सभी स्कूलों में बकरों का निर्माण कराया जाए और बच्चों एवं शिक्षकों की सुरक्षा को पुख्ता बनाई जाए।
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