पुंछ। पाक सेना की गोलाबारी के कारण पूरी रात दहशत में काटी। जान बचाने के लिए पक्के मकानों को छोड़ कच्चे मकानों में जा छुपे। गोलाबारी बंद होने तक वहीं रहे। सुबह जब पक्के मकानों को गोलियों से छलनी देखा, तो हमारे होश उड़ गए। यह कहना है नियंत्रण रेखा पर पाक सेना की अग्रिम चौकियों से मात्र ढाई सौ गज की दूरी पर बसे गांव दिगवार के लोगों का, जिनकी धड़कन दीवार, पेड़ और छत पर टकराती गोलियों के साथ तेज होती रही।
सीमांत ग्रामीण कुलदीप राज, हेमराज, अनिल कुमार, शांति देवी, हरप्रीत सिंह का कहना है कि रविवार रात करीब 11बजे हमारे गांव के सामने बेतार नदी के पार गांव बगयालदरा में पाक सेना ने गोलीबारी शुरू की, जिससे नींद खुल गई। इस बीच करीब 12 बजे अचानक पाक सेना ने लंगूर पोस्ट के उस पार से गांव दिगवार को निशाना बनाते हुए गोलीबारी शुरू की। कुछ ही देर में गोलियां हमारे घरों, खेतों और पेड़ों पर आकर लगने लगी।
बच्चे जागकर रोने-चिल्लाने लगे। करीब एक दशक बाद गांव में गोलियां बरसने से सबके होश उड़ गए। बाहर बंधे पशुओं की चिंता सताने लगी। गोलीबारी इतनी अधिक थी कि बाहर निकलना मुश्किल था। जब हमारे पक्के घरों की दीवारों पर लगातार गोलियां लगने लगीं, तो जान बचाने के लिए बच्चों को लेकर अपने कच्चे मकानों में जा छुपे, क्योंकि पाक सेना द्वारा दागे जाने वाले मोर्टारों से पक्के घरों को अधिक हानि होती है, जबकि कच्चे घरों को कम नुकसान पहुंचता है।