पुंछ। जिले में पाक सेना युद्धविराम का उल्लंघन कर गोलाबारी की आड़ में आतंकियों की घुसपैठ कराने में सफल रही है। इतना ही नहीं, इस पार पहुंचे आतंकी जिले में सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंच गए हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां खासकर सेना और सीमा सुरक्षाबल के लोग जो नियंत्रण रेखा पर तैनात हैं, वह आतंकियों की घुसपैठ को कोरी अफवाह बता अपना पीछा छुड़ाने का प्रयास करते हैं। लेकिन खुफिया एजेंसियाें के साथ ही नियंत्रण रेखा के आसपास रहने वाले सूत्र आतंकियों की घुसपैठ की पुष्टी करते हैं।
सूत्रों की बात सही मानें, तो जिले में कई दूर दराज के क्षेत्रों में इन दिनों एक बार फिर से आतंकियों के दल दिखाई देने लगे हैं। आतंकियों की संख्या तीन से सात तक बताई जाती है। गौरतलब है कि जिले में छह अगस्त को चक्का द बाग के खड़ी करमाड़ा में पाक सेना द्वारा बैट एक्शन में पांच भारतीय जवानों को शहीद किए जाने के बाद नियंत्रण रेखा पर लगातार गोलाबारी की जा रही है।
इसमें पाक सेना द्वारा भारतीय सेना की चौकियों के साथ ही रिहाइशी इलाकों में गोलाबारी कि जा रही है। पाक सेना द्वारा की जा रही गोलाबारी की भारतीय सेना द्वारा भी जमकर जवाबी कार्रवाई की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार गोलाबारी कि आड़ में उस पार से पुंछ जिले में ही 50 से 55 आतंकी घुसपैठ करने में सफल रहे हैं। पाक सेना द्वारा की जाने वाली भारी गोलाबारी के दौरान डर से नियंत्रण रेखा से सटे ग्रामीण घरों में दुबक जाया करते हैं। भारतीय जवान भी मोर्चों से ही जवाबी कार्रवाई को अंजाम देते हैं। इसी गोलाबारी का लाभ उठाते हुए आतंकियों ने सीमांत क्षेत्रों में घुसपैठ की। जाे अब दिखाई देने लगे हैं।
दहशतगर्दों के दिखने से ग्रामीणों में दहशत
सूत्रों के अनुसार पिछले पांच से छह दिन में जिले के दूरदराज के इलाके गुरसाई के बाईतड़ा में लोगों ने छह आतंकियों के एक दल को घूमते देखा। सलवा क्षेत्र में भी लोगों ने तीन आतंकियों को देखा है। वहीं सनेई के कांगड़ा क्षेत्र में चार से पांच आतंकी देखे गए। इसके अलावा मेंढर तहसील के कावूंआवाली क्षेत्र में छह आतंकी देखे गए।
एक माह पहले तक नहीं थी ऐसी स्थिति
गौरतलब है कि करीब एक-डेढ़ महीना पहले इन क्षेत्रों में एक भी आतंकी देखने को नहीं मिलता था। अब आतंकियों का दिखाई देना इस बात की पुष्टि करता है कि गोलाबारी की आड़ में पाक सेना आतंकियों को घुसपैठ कराने में कामयाब हो गई है। उधर इसी प्रकार राजोरी जिले में भी उस पार से बड़ी संख्या में आतंकियों की घुसपैठ हो चुकी है। इसका प्रमाण तीन दिन पहले नियंत्रण रेखा पर तरकुंडी क्षेत्र में लगी बाड़ कटी हालत में देखा जाना है। वहां दस लोगों के पांव के निशान भी देखने को मिले थे।