रामकोट। प्रजा परिषद, जनसंघ और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहम किरदार निभाने वाले पं. उमा दत्त को बुधवार को परिवार सदस्यों सहित स्थानीय लोगों, राष्ट्रीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पंडित उमा दत कभी न रुकने और कभी न झुकने वाले एक अग्रणी योद्धा थे। उन्होंने 1953 के आंदोलन में जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनाने के लिए एक विधान एक संविधान के लिए अपने पिता मंसाराम के साथ हिस्सा लिया था।
पंडित उमा दत का जन्म 3 मई 1927 को हुआ था। पिता पंडित मंसाराम और माता नानकी देवी के घर जन्मे पंडित उमा दत्त ने अपने जीवन काल में सरकार की कई यातनाएं सही और जेलों में कठिन समय भी गुजारा। स्व. पंडित उमा दत्त के सुपुत्र भाजपा के वरिष्ठ नेता पं. सतीश शर्मा ने बताया कि 370 को जम्मू व कश्मीर से हटाने के विरोध में उनके पिता को 5 महीने श्रीनगर जेल में भी काटने पड़े थे। इस दौरान उन्हें भारत का राष्ट्रीय झंडा तिरंगा फहराने के जुर्म में भी सरकार की आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था। इस दौरान सरकार ने तीन बार उनके घर की कुर्की का आदेश जारी किया था। मगर वह अपने पद पर कायम रहे और निडरता से जम्मू व कश्मीर और समाज कल्याण में लगे रहे। उन्होंने बताया कि तत्कालीन भाजपा के राज्य प्रधान ठाकुर बलदेव सिंह ने सन् 1987 में विधानसभा चुनाव में उनको टिकट मिला, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। इसके बाद पंडित उमा दत के कहने पर एडवोकेट लोकनाथ सांगडा कठुआ को भाजपा ने टिकट दी। उन्होंने अपने जीवन में त्याग और समर्पण के साथ पार्टी के साथ कार्य किया और लोक सेवा की ओर आकर्षित रहे। 26 जनवरी 2024 को उन्होंने 97 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। इसके बाद बुधवार को उनके निवास स्थान रामकोट में उनके उठाला के उपलक्ष्य पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस मौके पर भाजपा के महामंत्री अशोक कोल, पूर्व अध्यक्ष भाजपा सत शर्मा, पूर्व वित्त मंत्री पवन गुप्ता, पूर्व मंत्री सुनील शर्मा, एमएलसी विक्रम रंधावा, बलदेव राज शर्मा पुरुषोत्तम धादिति जम्मू का कश्मीर सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष मौजूद रहे।