कठुआ। कठुआ स्टेशन से बिना लोको पायलट ढलान से दौड़ी मालगाड़ी (14806आर) 80 किलोमीटर के बीच किसी भी स्थान पर जान-माल का नुकसान कर सकती थी लेकिन स्टेशन अधीक्षक की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। मालगाड़ी के निकलते ही स्टेशन अधीक्षक ने सबसे पहले फिरोजपुर मंडल को सूचित किया और फिर इसकी सूचना सभी स्टेशन अधीक्षकों को भेजी गई। इससे तुरंत सभी फाटक बंद करवा दिए गए। कठुआ से उच्ची बस्सी के बीच आते सभी स्टेशनों पर अन्य ट्रेनों को रुकवाकर पहले सिग्नल क्लीयर किए गए। गनीमत रही कि रास्ते में कई खतरनाक घुमावों और पुलों को पार करने के बाद भी ट्रेन पलटी नहीं। ट्रेन उन सभी पुलों और घुमावों को करीब 100 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से पार कर गई जिनकी गति इससे आधी से भी कम निर्धारित है। जब तक मालगाड़ी रूकी नहीं इसकी गति के साथ अधिकारियों के दिल की धड़कनों की भी गति बढ़ी रही। इस ट्रेन के गुजरने के कई लोग प्रत्यक्षदर्शी भी रहे। लोगों ने बताया कि जब ट्रेन गुजरी तो यह पता नहीं था यह बिना लोको पायलट के जा रही है लेकिन इतना अचंभा जरूर हुआ कि कभी जीवन में इतनी स्पीड से जाती मालगाड़ी नहीं देखी थी। इसलिए एक पल मन में यह जरूर आया कि कुछ तो गड़बड़ी है। जब सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने लगे तब जाकर यह स्पष्ट हो पाया।पठानकोट से ऊंचाई पर स्थित है कठुआ स्टेशन, इसलिए बढ़ती गई गति
सूत्रों के अनुसार मालगाड़ी के कम समय में करीब 100 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ने के पीछे बड़ा कारण कठुआ रेल स्टेशन का ऊंचाई पर स्थित होना है। कठुआ रेलवे स्टेशन की समुद्र तल से ऊंचाई 393.080 मीटर है जबकि, पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन की 329.87 मीटर। ऐसे में दोनों रेलवे स्टेशनों की समुद्र तल से ऊंचाई का 63.93 मीटर का बड़ा अंतर ही ट्रेन की स्पीड बढ़ने का कारण माना जा रहा है।
आगे नहीं जानी थी, कठुआ में ही रुकनी थी ट्रेन
पत्थर लेकर पहुंची ट्रेन को कठुआ में ही रुकना था। इसी बीच लोको पायलट ट्रेन से बाहर आ गया। ट्रेन को ढलान पर रोकने के रेलवे के नियमों के मुताबिक कर्मचारियों ने एहतियात बरती थी या नहीं अभी इस पर रेलवे अधिकारी कुछ भी स्पष्ट रूप से नहीं बता रहे हैं।