कठुआ। शनिवार की रात 12 बजे तेज बारिश हो रही थी। चारों तरफ अंधेरा और जोर-जोर से बिजली कड़क रही थी। अनहोनी के अंदेशे से तीन बच्चों की मां शकीला बीवी को नींद नहीं आ रही थी। इसे किस्मत ही कहेंगे कि शकीला के अनहोनी के अंदेशे से चार बकरवाल परिवारों के 20 लोगों की जान मलबे के नीचे आने से बचाई है।
शकीला बीवी ने बताया कि पंचायत भेड़ भलोड़ के पंजवारी मोड़ा के पहाड़ी पर कुल छह बकरवाल परिवार ने आशियाने बनाए हुए थे। इसमें दो बकरवाल परिवार मौसमी स्थानांतरण के चलते अपने मवेशियों के साथ किश्तवाड़ के बाडवन इलाके में चले गए थे। जबकि चार परिवार थोड़े से माल-मवेशी के साथ इसी पहाड़ी पर बने टीन के शेड़ में आसरा लिए हुए थे।
कुनबे के सबसे वरिष्ठ 70 वर्षीय याकूब ने बताया कि शनिवार को आधी रात पहाड़ी के उस पार जब बागड़ा में बादल फटा तो उससे आई अचानक बाढ़ और भारी मलबे के नीचे आने से उनके घर दब गए। गनीमत रही कि शकीला बीवी ने समय रहते सभी को आगाह कर दिया, जिसके चलते किसी की भी जान को तो कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन उनके घरों में रखा सारा सामान और माल-मवेशी, जिसमें खासकर हर परिवार की 10 से 20 बकरियां बाढ़ में बह गईं या मलबे के नीचे आ कर मर गई हैं।
याकूब की पत्नी जो अपने दो बेटों के साथ इस समय पंचायत घर भेड़ भलोड़ में राहत शिविर में अन्य पीड़ित परिवारों के साथ रह रही है ने बताया कि याकूब बीते साल से बीमार हैं। बीमारी की बजह से वह अकेले 100 मीटर भी चल नहीं सकते हैं। घटना के दिन जब जलजला आया तो उसके बेटे शरीफ पांच छोटे-छोटे बच्चों को पहाड़ी पर सुरक्षित ले गए, लेकिन बीमार याकूब को सबसे बाद में घर के अंदर से निकाला। पूरी रात वह बारिश में पहाड़ी पर बैठे रहे और जब सुबह खड्ड में बाढ़ कम हुई तो सभी पीड़ितों ने मंदिर के पास बने पंचायत घर में आसरा लिया।
पंचायत घर में राहत शिविर में रह रहे है 20 लोग
सभी पीड़ित परिवार पिछले चार दिनों से भेड़ भलोड़ पंचायत घर में बनाएंगे राहत शिविर में रह रहे है। जिला प्रशासन ने उन्हें खाने के लिए राशन तो उपलब्ध करवाया है, लेकिन उनके पास सोने के लिए बिस्तर नहीं है। मोहम्मद रियाज ने बताया कि गांव वालों ने कुछ कंबल और कपड़े दिए है, लेकिन वह अपर्याप्त हैं। उनका कहना है कि जब मौसम साफ होगा तो घरों में दबा हुआ सामान बाहर निकालेंगे।