राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ के मुख्य द्वार पर धरना देती टर्मिनेट की गई स्वास्थ्य कर्मी
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कठुआ। कोरोना महामारी के बीच एक ओर जहां सरकार सेवानिवृत्त लोगों की मदद लेने की बात कर रही है वहीं लोगों को नौकरी से निकालकर दरबदर किया जा रहा है। सरकार और भाजपा के नेता 50 हजार नौकरियों का दावा कर रहे हैं तो वहीं जिन्हें अस्थाई नौकरियां दी गई हैं, उन्हें इस्तेमाल कर बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। यह बातें रोष प्रकट करते हुए जीएमसी कठुआ से टर्मीनेट की गई अनुबंध के आधार पर लगाई गई जूूनियर स्टाफ नर्सों ने कहीं। उन्होंने जहां सुबह जीएमसी कार्यालय परिसर में रोष प्रदर्शन किया। वहीं इसके बाद जीएमसी के मुख्य गेट पर धरना देते हुए स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी देते हुए उन्हें जीएमसी कठुआ के मुख्य गेट से हटा दिया। रोष प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सिर्फ इतनी मांग है कि जीएमसी प्रधानाचार्य उनसे आमने सामने आकर बात करें। पुलिस ने 144 का हवाला देकर हटा दिया है। जानते हैं कि देश के हालात ऐसा करने के लिए सही नहीं है लेकिन उनके पास कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि गलत समय बताकर उन्हें आवाज उठाने से रोका जा रहा है लेकिन इस समय उन्हें दरबदर किया जाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना के बीच उनकी सेवाएं ली गई हैं और अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अन्य जिलों में टर्मीनेशन नहीं किया गया है जबकि कठुआ में उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया है।