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Kathua News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगी कठुआ की कीर्ति शर्मा

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कठुआ। जिले के शीतलनगर की कीर्ति शर्मा मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जम्मू में मिलेंगी। इसको लेकर कीर्ति काफी उत्साहित हैं। अपने खुद के दम पर नाम और पहचान बनाने वाली कीर्ति ने 30 हजार कर्ज लेकर एक गाय से डेयरी का काम शुरू किया और अब समूह के साथ मिलकर 10 गायों का दूध बेचकर 25 हजार रुपये कमा रही हैं। यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए उन्हें जम्मू से बुलावा आया है। कीर्ति सोमवार सुबह ही जम्मू के लिए रवाना हो गईं। कीर्ति ने बताया कि 2005 में उनकी शादी हुई। पति किसान थे और आय के स्रोत अधिक नहीं थे लेकिन पशु पालन विभाग से मिली सहायता और मार्गदर्शन से उन्होंने खुद का रोजगार शुरू करने की सोची। 2017 में उन्होंने 30 हजार रुपये कर्ज लेकर एक गाय खरीदी और दूध बेचकर पैसे कमाने लगीं। उसके बाद उनके साथ गांव की अन्य आठ महिलाएं जुड़ीं और अब सभी ने मिलकर एक समूह बनाया। अब उनके समूह के पास 10 गायें हैं और कीर्ति खुद 25 हजार रुपये महीना कमा रही हैं।
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सरकारी मदद से बिना नाम और पहचान
स्नातक की पढ़ाई कर चुकी कीर्ति बताती हैं कि पढ़े लिखे होने के बावजूद उनके पास कोई काम नहीं था। कीर्ति बताती हैं कि जब उन्होंने शुरुआत की थी तो उन्हें कोई नहीं जानता था लेकिन अब उनका नाम और पहचान बनी है। इसमें किसान पति मोहम्मद फारूक वानी का भी काफी सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि पशुपालन विभाग के जिलाधिकारी डॉ. जुगल किशोर ने उन्हें बेहतर मार्गदर्शन दिया। इससे वह आगे बढ़ पाईं और आज वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाली हैं।
बोली, घबराहट और खुशी का हो रहा एहसास
कीर्ति ने कहा कि वह देश के प्रधानमंत्री से मिलेंगी। यह किसी सपने के सच होने से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि वह आज तक किसी राजनेता से नहीं मिलीं। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि कभी देश के प्रधानमंत्री से आमने-सामने बात कर पाएंगी, लेकिन, अब उनका सपना सच होने जा रहा है।
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ए-हेल्प वर्कर के तौर पर भी काम कर रहीं कीर्ति
कीर्ति ने बताया कि वह अपने क्षेत्र में ए-हेल्प वर्कर (स्वास्थ्य और पशुधन उत्पादन के विस्तार के लिए मान्यता प्राप्त एजेंट) के तौर पर काम भी कर रही हैं। इसमें वह अपने क्षेत्र में पशु पालकों को पशुओं में विभिन्न संक्रामक रोगों की रोकथाम करने, राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान, पशुओं की टैगिंग और पशु बीमा में योगदान दे रही हैं। वह स्थानीय विभागीय गतिविधियों में पशु चिकित्सकों की सहायता करने, पशुपालकों को उद्यमिता विकास के लिए ऋण लेने में मदद करने और आवेदन भरने जैसे कार्य करती हैं।
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