कठुआ। बिजली संकट और सरकारी विभाग की ओर से समय पर बिजली बिल जमा करवाने की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए यूटी प्रशासन ने नया तरीका खोज निकाला है। प्रशासन ने सभी सरकारी कार्यालयों की बिजली सोलर पैनल से संचालित करने की योजना बनाई है। इसको लेकर सभी विभागों के अधिकारियों को पत्र जारी कर रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें उनसे कार्यालय की छत पर जगह का माप और मासिक बिजली की खपत संबंधी विवरण मांगा गया है। इस योजना को बिजली विभाग का प्रोजेक्ट विंग अमली जामा पहनाएगा। बताया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर सरकार इस परियोजना को गर्मियों से पहले 100 फीसदी लागू करना चाहती है ताकि इन गर्मियों में बिजली की किल्लत पेश न आए। अधिकारियों का तर्क है कि सौर ऊर्जा का उपयोग करके सरकारी विभाग न केवल स्वच्छ पर्यावरण में योगदान दे पाएंगे बल्कि, राज्य के खजाने का वित्तीय बोझ भी काफी हद तक कम करेंगे और 12 महीने रहने वाली बिजली की कमी की समस्या का दीर्घकालिक समाधान भी हो जाएगा। इसके अलावा जब ओवरलोडिंग कम होगी तो आम जनता को भी इसका फायदा मिलेगा। उनको भी बिजली की किल्लत से छुटकारा मिलेगा।
विभागों से यह मांगा गया विवरण
विभागीय सूत्रों ने बताया कि मांगे गए विवरण में यह पूछा गया है कि कार्यालय किराये की इमारत में चल रहा है या सरकारी स्वामित्व वाली इमारत में। इसके अलावा, बिजली बिलों पर होने वाले मासिक खर्च का विवरण भी देना होगा। हर महीने कितने यूनिट बिजली की खपत होती है। यह भी बताना होगा कि सरकारी कार्यालय की छत पर कितनी जगह है, जहां सोलर पैनल लगाया जा सकता है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस रिपोर्ट के अनुसार ही सौर पैनल का डिजाइन और क्षमता तय की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसी माह सभी विभागों को विवरण भेजने के निर्देश मिले हैं।
बाहरी राज्यों से बिजली खरीद होगी कम
बता दें कि सरकार का यह कदम बिजली की बचत के साथ सरकारी खजाने को भी फायदा पहुंचाएगा। मौजूदा समय में बाहरी राज्यों से महंगे दामों पर बिजली खरीदी जा रही है। इससे सरकार को काफी नुकसान हो रहा है। सरकारी दफ्तरों में सोलर पैनल लगाए जाने से बाहरी राज्यों से सरकार महंगे दामों पर बिजली नहीं खरीदेगी। अगर किसी विभाग में सौर ऊर्जा से ज्यादा प्रोडक्शन होगी तो उसे बिजली विभाग खरीदकर अन्य स्थान पर उपयोग में ला सकता है।
गर्मियों में नहीं झेलने होंगे लंबे-लंबे कट
सोलर पैनल से पैदा होने वाली बिजली के चलते हर दफ्तरों में लगने वाले बिजली के अघोषित कटों से निजात मिलेगी। 24 घंटे बिना कटौती बिजली उपलब्ध रहेगी। इससे सरकारी दफ्तरों में काम प्रभावित न होने के साथ-साथ ही लोगों को भी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं, कई दफ्तरों में बिजली कटौती के दौरान चलाए जाने वाले जेनसेट पर डीजल की खपत को खत्म किया जाएगा। वहीं, सरकारी दफ्तरों में सोलर पैनल लगाने का मकसद बिजली उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ बढ़ रहे बिजली के लोड को कम करना है। सोलर पैनल लगने से बिजली का उत्पादन बढ़ेगा और ग्रिड पर लगे बिजली के उपकरणों में लोड बढ़ने से आने वाली समस्या भी खत्म हो जाएगी।
-सरकार के निर्देश पर सभी सरकारी विभागोंं से उनकी खपत और जगह संबंधी विवरण मांगा गया है। सरकार की योजना है कि सभी कार्यालयों की बिजली सौर ऊर्जा से संचालित की जाए। मार्च अंत तक सरकारी दफ्तरों में सोलर पैनल लगाने का काम प्रोजेक्ट विंग शुरू करेगा। इससे बिजली की बचत भी होगी और ओवरलोड के कारण होने वाली समस्याओं से राहत मिलेगी।
-सुनील शर्मा, एईई, पीडीडी