श्री अद्वैत स्वरूप आश्रम में जारी 34वें भक्ति ज्ञान सम्मेलन का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शहर के शिवानगर स्थित श्री अद्वैत स्वरूप आश्रम में जारी 34वें तीन दिवसीय वार्षिक भक्ति ज्ञान सम्मेलन का समापन हो गया है। बुधवार को सम्मेलन के समापन कार्यक्रम में विधिविधान से ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद भक्ति संगीत और संत समागम का आयोजन किया गया। इसमें महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद जी महाराज, नंगली साहिब आधार शब्दानंद जी महाराज, सार दिव्यानंद जी महाराज, रविंद्रानंद जी महाराज स्वामी प्रेम श्रद्धानंद जी महाराज, स्वामी रामात्मानंद जी महाराज ने अपने पावन प्रवचन रूपी गंगा में जिले भर से आई संगत को स्नान करवाया।
इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद जी महाराज ने कहा कि इस धरा पर जन्म लेने वाला हर प्राणी जीवन मरण के चक्र से मुक्ति पाने का प्रयास करता है। मगर यह उसे कैसे प्राप्त होगा इसकी जानकारी उसे नहीं होती। उन्होंने कहा कि गुरु के पुनीत सांनिध्य में मिलने वाला सत्संग का लाभ हमें इस चक्र से मुक्ति दिला सकता है। सत्संग ही वह मार्ग है जो हमारा लोक तो बेहतर बनाता ही है। साथ ही भगवान के परमधाम में भी आश्रय दिलाता है। सत्संग के परिणाम से हमारे मन में किसी भी तरह का संशय नहीं रहता और हम ईश्वर के प्रेम को प्राप्त कर सकते हैं, जो हमारे कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि इस धरा पर जन्म लेने वाले हर प्राणियों में सबसे अधिक बुद्धिमान होने के बावजूद मनुष्य ही सबसे ज्यादा भ्रमित है। गुरु का सांनिध्य अज्ञान को हटाकर मानव को ज्ञानरूपी प्रकाश की ओर ले जाता है। गुरु की ओर से मिला ज्ञान हमें जीवन रूपी वैतरणी से पार करवाकर स्वर्ग की ओर ले जाता है। इसलिए हमें गुरु को धारण कर उनके पथ पर चलने का संकल्प लेना होगा। कार्यक्रम के संबंध में आश्रम की प्रमुख सार ज्योत्सना नंद बाई जी ने बताया कि आश्रम में वार्षिक रूप से होने वाले इस सम्मेलन का हर साल धूमधाम से आयोजन किया जाता रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में जिले भर से आने वाली संगत को संत जनों के आशीष प्राप्त करने का अवसर मिलाता है।