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Kathua News: मैंगो विलेज परियोजना बंद होने से टूटी कंडी के किसानों की आस

Sun, 18 Feb 2024 02:40 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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- उन्नत प्रजाति के लगवाए 16790 आम के पौधों में से 90 फीसदी खत्म
-451 लाख खर्च करने की थी योजना, फंड के अभाव में तोड़ा दम
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के कंडी क्षेत्र में आम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मैंगो विलेज परियोजना सिरे नही चढ़ पाई है। जिला के कठुआ और बरनोटी ब्लॉक में शुरू हुई योजना पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है। ऐसे में जहां इस योजना से जुड़े बागवानों की उम्मीद टूटी है, वहीं उन्हें काफी आर्थिक नुकसान भी हुआ है।
वर्ष 2017 में पूर्व मंत्री राजीव जसरोटिया की ओर से मंजूर करवाई गई मैंगो विलेज परियोजना से कंडी इलाके के किसानों के दिन बहुरने की उम्मीद जगी थी। इसके पहले चरण में 91.38 लाख खर्च किया जाना था। तीन साल चली योजना के तहत कठुआ और बरनोटी ब्लॉक में बागवानी विभाग द्वारा 46 बागवानों को योजना का लाभार्थी बनाते हुए 42.30 हेक्टेयर में उन्नत प्रजाति के 16790 आम के पौधे लगवाए गए थे। जिस पर करीब 66.71 लाख रुपये खर्च भी किया गया। इसमें लाभार्थियों के बागों में सिंचाई की सुविधा के लिए बोरिंग व अन्य उपकरण भी उपलब्ध कराए गए। मगर इसके बाद योजना के आगे न बढ़ने से बागवानों को उनका वह लाभ नहीं मिला, जिसकी अपेक्षा के साथ वह इस योजना के साथ जुड़े थे। उधर, कंडी क्षेत्र में बंदरों के आतंक का परिणाम यह रहा कि जिन बागवानों ने योजना के तहत आम के बाद लगाए थे। अब वहां 90 प्रतिशत तक आम के पौधे खत्म हो गए हैं।
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कश्मीर के बेहतरीन सेब की तर्ज पर कठुआ के लिए मंजूर हुई कुल 451 लाख की इस परियोजना में शुरुआत से ही फंडों का अभाव बना रहा। इस कारण तीन साल चली परियाेजना में पहले चरण के निर्धारित की धनराशि भी पूरी जारी नहीं हो पाई। इस कारण कठुआ में बनने वाले दो क्लस्टर आज तक अस्तित्व में नहीं आ पाए। इसके अतिरिक्त मैंगो विलेज में आम की प्रसंस्करण इकाइयां भी स्थापित की जानी थी। यहां से आम के अचार, आम का रस, आम का पल्प, आम पापड़ जैसे अन्य आम उत्पादों को तैयार कर अन्य राज्यों को निर्यात किया जाना था।
सहार क्षेत्र के किसान व पूर्व सरपंच भोली सिंह का कहना है कि परियोजना को लागू करने पहले क्षेत्र की स्थिति की समीक्षा की जानी चाहिए थी, जो नहीं की गई। इसका परिणाम यह रहा है। योजना के तहत लगाए गए पौधे इलाके में घूमने वाली बंदरों की फौज ने बर्बाद कर दिया और इस पर लगा सरकारी पैसा व बागवान का पैसा भी अब लगभग खत्म हो चुका है। वहीं, योजना के लाभार्थी लोगेट निवासी अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने योजना के तहत लगाए गए बाग बेहतर बनाने के लिए अपनी ओर से भी काफी पैसा खर्च किया था। लेकिन लगाए गए बाग में काफी पौधे लगने के साथ ही सूख गए और कुछ को बंदरों ने बर्बाद कर दिया। अब पूरे बाग में चंद पौधे बचे हैं। इसमें निकलने वाले फल का कोई व्यवसायिक इस्तेमाल फिलहाल नहीं हो रहा है।
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जिले में प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई परियोजना तीन साल की अवधि के लिए ही थी। लाभार्थियों को उन्नत किस्म के पौधे उपलब्ध करवाने के साथ उनके रोपण में भी विभाग ने भूमिका अदा की थी। इसके अलावा योजना के लाभार्थियों को बाग की सिंचाई के बोर भी उपलब्ध करवाए गए थे। अब योजना बंद हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी कोई लाभार्थी अगर किसी भी तरह की तकनीकी मदद के लिए उनके पास आता है तो विभाग उसके लिए तैयार है।
सुशील कुमार अंगुराना
मुख्य बागवानी अधिकारी
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