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Kathua News: लोक अदालत में किया 850 मामलों का निपटारा

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कठुआ। राष्ट्रीय लोक अदालत ने नौ साल से अपने ही भतीजे के साथ चल रहा एक कमरे के बंटवारे का मामला कुछ ही मिनट में सुलझा लिया गया।
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बड़े भाई के गुजर जाने के बाद चाचा-भतीजा के बीच गलतफहमी से शुरू हुआ जमीन का मामला अदालत ने दोनों पक्षों को बिठाकर हल किया। वहीं, कोरोना काल की आर्थिक मंदी से फाइनेंस कंपनी का लोन की किश्त न चुकाने के मामले को अदालत ने कुछ ही मिनटों के सलाह-मशवरे से निपटा कर दोनों पक्षों को घर भेज दिया। शनिवार को जिले भर में तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत को आयोजित कर पांच बेंचों ने 850 मामलों का निपटारा कर पांच करोड़ 13 लाख 78 हजार 798 रुपये की समझौता राशि वसूल की है।
तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1217 मामलों को निपटाया गया। इसके तहत तीन बेंच जिला न्यायालय परिसर में स्थापित किए गए थे, जबकि एक बेंच हीरानगर और बिलावर मुंसिफ न्यायालय में स्थापित की गई थी। शनिवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कठुआ जतिंदर सिंह जमवाल के मार्गदर्शन में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत जिला मुख्यालय के साथ-साथ जिला के सभी मुंसिफ न्यायालयों में आयोजित की गई। इस मौके पर हिंदू विवाह अधिनियम (एचएमए), मोटर वाहन अधिनियम, एमएसीटी मामले, बैंक रिकवरी, आपराधिक समझौता योग्य और ट्रैफिक चालान आदि मामले निपटाए गए।
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भाई के गुजर जाने के बाद गलतफहमी में शुरू हुआ जमीन का मामला


भाई के मृत्यु के बाद गलतफहमी में शुरू हुआ जमीन का मामला शनिवार की राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलझा लिया गया। पिछले नौ सालों से अदालत में चला आ रहे मामले में कठुआ के पारलीबंड़ स्थित रहने वाले चाचा सोहन लाल और भतीजा विशाल के बीच 225 स्क्वायर फीट जमीन को लेकर वर्ष 2015 से चल रहा था। लोक अदालत में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुनीश कुमार मन्हास और मुंसिफ चीना सुंबड़िया की बेंच ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से सुलझा लेने का आदेश दिया।
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कोरोना मंदी के चलते कर्जदार नहीं चूका पाया था फाइनेंसर का कर्ज

एक अन्य मामले में कोरोना काल की आर्थिक मंदी की मार झेल रहे युवक ने अपनी कार के लिए श्रीराम फाइनेंस से दो लाख का लोन लिया हुआ था। इसे कोरोना मंदी शुरू होने से पहले तक कर्जदार इंदर कुमार बट्ट एक लाख 85 हजार लूटा चुके थे। लेकिन मंदी के दौरान किश्त न चुकाने के चलते 2023 के अंत में श्रीराम फाइनेंस कंपनी ने कर्जदार इंदर बट्ट पर मुकदमा दायर कर उससे 5 लाख 50 हजार की मांग की। इसके बाद मामला लोक अदालत में पहुंचा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुनीश कुमार मन्हास और मुंसिफ चीना सुंबड़िया की बेंच ने कर्जदार इंदर कुमार को 1 लाख 85 हजार कर्ज की रकम को अदाकर मामले में समझौता करवा दिया।
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