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Kathua News: भगवान की बाल लीलाएं सुन मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

Mon, 27 Nov 2023 12:47 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कठुआ। अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी शहर के तारानगर में जारी श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। कथा के छठें दिन कथाव्यास आदियोगी गौतम जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जहां भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कथा वाचन कर भक्तों को भावविभोर कर दिया। वहीं अपने प्रवचन के दौरान कहा कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। लिहाजा हम सभी को धर्म के पालन को अपने जीवन में प्राथमिकता देनी होगी।

आदियोगी ने श्रद्धालुओं को लीला और क्रिया में अंतर बताते हुए कहा कि अभिमान और सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है। जिसे न तो प्राप्त का अभिमान है और न ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा है उसे ही लीला कहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे। उन्होंने कहा कि माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है। कन्हैया ने भक्तों के मन की चोरी की। उन्होंने भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर कंस उनकी मृत्यु के लिए राज्य की सबसे बलवान राक्षसी पूतना को भेजता है। राक्षसी पूतना भेष बदलकर भगवान कृष्ण को अपने स्तन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है, लेकिन भगवान उसका वध कर देते हैं।
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इसी प्रकार कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन कार्यक्रम की तैयारी करते हैं, लेकिन भगवान कृष्ण उनको इंद्र की पूजा करने से मना कर देते हैं और गोवर्धन की पूजा करने के लिए कहते हैं। यह बात सुनकर भगवान इंद्र नाराज हो जाते हैं और गोकुल को बहाने के लिए भारी वर्षा करते हैं। इसे देखकर समस्त ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देखकर भगवान कृष्ण कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी लोगों को उसके नीचे छिपा लेते हैं। भगवान द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाकर लोगों को बचाने से इंद्र का घमंड चकनाचूर हो गया। मथुरा को कंस के आतंक से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया। आदियोगी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण अवतार लेकर धर्म की रक्षा करने के लिए असुरों का विनाश करते हैं। पूतना वध, संकटासुर, बकासुर, धेनकासुर इत्यादि राक्षसों को मार कर के धर्म की रक्षा करते हैं।
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