देश की सुरक्षा के लिए पूर्वाेत्तर भारत के मणिपुर से जिसे दो दिन बाद आना था अपने बच्चों, पत्नी, माता-पिता और सगे संबंधियों के साथ मिलना था। उसका शनिवार देर रात कठुआ शहर के वार्ड 13 फूला चक में पार्थिव शरीर पहुंचा। जिसे देख हर किसी की आंख भर आई। रविवार की सुबह शहर के ड्रीमलैंड पार्क स्थित श्मशान घाट पर जब सैनिक सम्मान के साथ रायफलमैन जोगेश कुमार के अंतिम संस्कार शुरू हुआ तो वृद्ध पिता नागरमल शर्मा अपने आप को नहीं रोक पाए और फफकते हुए उसके दो दिन के बाद आने की बात को कहने लगे।
9 असम राइफल के जवान जोगेश कुमार गत मई माह में अपने पूरे परिवार से जल्द मिलने का वादा कर ड्यूटी पर गए हुए थे। जहां से गत 21 सितंबर की रात करीब 10 बजे उन्होंने अपनी पत्नी मंजू बाला से फोन पर बात करते हुए बताया था कि उनकी छुट्टी मंजूर हो गई है और वह मेडिकल चेकअप के लिए ट्रांजिट कैंप में आ गए हैं।
इससे पूरे परिवार में खुशी थी और हर कोई उनके आने का इंतजार कर रहा था। पिता नागर मल जहां जवान बेटे की मौत से बेहाल दिखे वहीं, मां शक्ति देवी भी अपने बेटे के पार्थिव शरीर को नहीं देख पा रही थी। पत्नी ने तो अपने पति के पार्थिव शरीर को देख बेसुध हो गई। उसे स्थानीय महिलाएं किसी तरह संभाल रही थी।
वहीं, उनकी 10 साल की बेटी कुशली को पिता के इस दुनिया में न होने का अहसास था लेकिन पांच वर्षीय बेटा दीशांत को तो कुछ पता ही नहीं था। इस दौरान सभी की आंखे नम थी। तीन भाईयों में दूसरे नंबर पर आने वाले जोगेश कुमार घर में एक मात्र सरकारी सेवा में थे। उनके बडे़ भाई एक स्थानीय निजी कंपनी में काम करते हैं जबकि छोटा भाई कृषि से जुड़ा हुआ है। अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद सेना के अधिकारियों ने परिजनों को बताया कि शनिवार की रात 11 बजे तीन मंजिला इमारत की छत से गिरने से मौत हुई। कारणों की जांच की जा रही है।