संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। शहर के महाकालेश्वर शिवदुर्गा मंदिर में शिवकथा का आयोजन जारी है। शनिवार को कथा से पूर्व मंदिर में जुटे भक्तों ने सत्संग व कीर्तन कर मंदिर के वातावरण को भक्तिमय बनाया। वहीं, महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी अक्षरानंद जी महाराज द्वारा शुरू किया गया श्री हरि विष्णु भगवान के एक हजार नामों का उच्चारण व उनके अर्थ बताने का क्रम संपूर्ण हुआ। वहीं उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण कथा के बारे में बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का लौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। महामंडलेश्वर ने भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि मन में भगवान को उतारने का नाम ही भक्ति है।
उन्होंने कहा कि इस संसार में जन्म लेने वाला हर मनुष्य मोहमाया में फंसा रहता है। जबकि सत्संग व कथा के माध्यम से वहीं मनुष्य श्री हरि के चरणों में स्थान पा सकता है। श्रीमद्भागवत कथा भगवान से हमें जोड़ती है। लिहाजा हमें इसका श्रवण करना चाहिए। उन्होंने बच्चों को संस्कारवान बनाने के लिए सत्संग कथा के लिए प्रेरित करने के लिए कहा। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गुरु की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि स्मरण, भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है। महामंडलेश्वर ने भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि मन में भगवान को उतारने का नाम ही भक्ति है। भगवान की पहचान ज्ञान के द्वारा होती है। अगर आप का चित्त आनंदमय हो जाए तो समझिए कि भगवान की अनुभूति है। अंत: करण में भगवान का वास ही वह आहट है, जब मन की स्थिति पाप मुक्त हो जाए तो भगवान का आगमन होता है। भगवान की स्तुति, स्मरण, कीर्तन, पूजा-दर्शन, ध्यान और प्रणाम करने से अंतःकरण शुद्ध और मन पाप मुक्त हो जाता है। भगवान के विराट रूप को देखकर दैत्य छुपने लगते हैं और भक्त उनके इस रूप को देखकर निहाल हो जाते हैं। जिस प्रकार नरसिंह भगवान के रूप से बड़े बड़े दैत्य डर गए लेकिन प्रहलाद उस रूप को देखकर बिल्कुल नहीं डरा। उन्होंने बताया कि जब वृत्ति में धर्म का अनुसंधान होने लगे तब समझना चाहिए आपके आराध्य की अभिव्यक्ति है क्योंकि यती वह चिन्ह है।