कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नौ साल पुराने घर में तोड़फोड और मारपीट के एक मामले में एक परिवार के पांच लोगों को साक्ष्यों के अभाव बरी कर दिया है।
आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ संदेह से परे मामला साबित करने में असफल रहा है। अदालत ने कहा कि यह मामला पारिवारिक संपत्ति विवाद की उपजा है और सबूतों में गंभीर विरोधाभास हैं। क्योंकि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से संपत्ति विवाद चल रहा है।
इसके चलते आरोपियों पर मारपीट और तोड़फोड़ के आरोप लगाया गए थे लेकिन अभियोजन पक्ष की कहानी में इसका कोई जिक्र नहीं है। वहीं गवाहों के बयानों में घर का ताला तोड़ने, बर्तन चोरी और कपड़े फाड़ने जैसी गंभीर बातों का जिक्र नही किया गया। शिकायत में इसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इसके अलावा कोर्ट ने माना कि कथित घटना के दौरान आसपास लोगों के एकत्र होने का दावा किया गया, लेकिन किसी स्वतंत्र गवाह को कोर्ट में गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जब अभियोजन पक्ष के मामले में गंभीर खामियां है, ऐसे में अभियुक्तों को दोषी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। संवाद