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Kathua News: मारपीट के मामले में दो आरोपियों को अदालत ने किया चार साल बाद बरी

Sun, 12 Oct 2025 01:54 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने रास्ता रोककर मारपीट मामले में दो आरोपियों को चार साल बाद बरी कर दिया है। अदालत ने दोनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया है।
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आदेश के अनुसार मामले में एफआईआर में देरी, गवाहों के विरोधाभासी बयान, स्वतंत्र गवाहों की अनुपस्थिति और साक्ष्यों की कमी के चलते अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में असफल रहा। कोर्ट में दायर पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी टोनी कुमार और रिंकू कुमार दोनों पुत्र काकू राम निवासी नगरी पर आरोप था कि उन्होंने 6 जुलाई 2021 को सूरज कुमार और उसके भाई काला राम रात के साढ़े दस बजे ईंट से हमला किया था। इसमें काला राम गंभीर रूप से घायल हो गए था।
इसके बाद घायल काला राम को उपजिला अस्पताल नगरी में उसे भर्ती करवाया गया जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देख बेहतर उपचार के लिए जीएमसी कठुआ रेफर कर दिया। घायल के भाई घटना के दिन ही इसकी शिकायत पुलिस में कई गई थी।
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इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323 और 341 के तहत मामला दर्ज कर चालान को 22 सितंबर 2021 को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। दोनों आरोपियों के बयान सीआरपीसी की धारा 251 के तहत कोर्ट में 5 नवंबर 2021 में दर्ज किए गए थे। इसमें उन्होंने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे की मांग की। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने अपना मामला साबित करने के लिए सूचीबद्ध छह गवाहों में से कुल पांच गवाहों से पूछताछ की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पीड़ित कला राम और शिकायतकर्ता सूरज कुमार की गवाही में कई विरोधाभास पाएंगे। इसके अलावा अदालत ने पाया की मामले में एफआईआर नौ दिन की देरी के बाद दर्ज की गई है और अभियोजन पक्ष ने एक भी स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया है।
हालांकि शिकायतकर्ता सूरज कुमार ने कहा कि उसने घटना वाले दिन ही शिकायत लिखवाई, जबकि दस्तावेज पर मामला दर्ज करने की तिथि 15 जुलाई लिखी गई है। इसके अलावा पीड़ित और उसके भाई की घटना के समय अलग-अलग बयान है। एक ने कहा कि घटना के समय अंधेरा था जबकि दूसरे ने कहा कि उस दिन चांदनी रात थी। कोर्ट ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए उन्हें बरी कर जमानती व व्यक्तिगत बांड को खारिज कर दिया।
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