कठुआ। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बढ़ रही स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता के बाद बढ़ी स्कैनिंग में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही हैं। पिछले साल जहां कुल 36 मरीज जिले में एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे, वहीं इस साल सात माह के भीतर ही 33 मरीजों को पॉजिटिव पाया जा चुका है। बनी, बसोहली, हीरानगर और बिलावर से एड्स के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। खास तौर पर प्रदेश के बाहर मजदूरी करने वाले वर्ग में इस तरह के मामलों की बढ़त देखी जा रही है, जो इसे अपने परिवार तक फैलाते जा रहे हैं। हालात यह हो चुके हैं कि जिले में 16 बच्चे भी अब एड्स संक्रमित हो चुके हैं।
अप्रैल से नवंबर माह के बीच आईसीटीसी कठुआ में की गई मरीजों की जांच के बाद अबतक 33 लोगों को एचआईवी पॉजिटिव पाया गया है। खास बात यह है कि बीते वर्ष जहां कुल 5126 मरीजों की जांच की गई थी वहीं इस साल 4518 मरीजों की एचआईवी जांच की जा चुकी है। पिछले तीन साल में स्कैनिंग बढ़ने के साथ ही मामले भी दोगुने के लगभग सामने आ रहे हैं। हैरत इस बात की है कि अब प्रतिमाह औसतन पांच मरीजों को जिले में पॉजिटिव पाए जाने लगा है। एकीकृत परामर्श एंव परीक्षण केंद्र (आईसीटीसी) कठुआ से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले बारह वर्षों में अबतक 363 लोगों को जिले में एचआईवी पॉजिटिव पाया जा चुका है। इनमें से 293 लोग दवा हासिल कर रहे हैं।
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जहां शिक्षा अधिक, वहां भी बढ़ रहे मामले
इतनी बड़ी संख्या में मरीजों का आना ध्यान देने वाली बात यह है कि जहां बनी, लोहाई मल्हार, बसोहली आदि इलाकों के लोग पल्लेदारी का काम करने के लिए बाहरी राज्यों में जाते हैं, वहां एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या कम है। जबकि अशिक्षित लोग भी यहीं अधिक है। हैरान करने वाली बात यह है कि कुल एचआईवी मरीजों में से एक बड़ा हिस्सा हीरानगर, कठुआ और बिलावर ब्लॉक के मरीजों का है। जिला कठुआ के आईसीटीसी सेंटर में मरीजों की जांच कर एचआईवी पॉजिटिव होने का पता लगाया जा सकता है। जिसकी निशुल्क जांच की जाती है और पर्ची बनवाने की भी जरूरत नहीं होती। इसके साथ दवा भी निशुल्क दी जाती है। सामाजिक बहिष्कार से बचने के लिए लोग दूसरे जिलों में जाकर भी दवाएं लेते हैं।