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Kathua News: जीवन-मरण के बंधन से मुक्ति दिलाता है सत्संग

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शहर के वार्ड 8 में आयोजित श्रीमद भगवत कथा का श्रवण करते श्रद्धालु। संवाद - फोटो : KATHUA
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कठुआ। शहर के वार्ड आठ में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन जारी है। कथा वाचक महेश दास शास्त्री द्वारा किए जा रहे प्रवचनों की अमृत वर्षा का आनंद लेने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। बुधवार को कथा के तीसरे दिन अपने प्रवचनों के दौरान कथा व्यास ने उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन का सच्चा सुख प्राप्त करने के लिए सत्संग को सबसे अधिक महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सत्संग से व्यक्ति जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो सकता है।
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कथा व्यास ने सूत जी और सनकादिक ऋषि का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सूत जी महाराज ने हरि अनंत हरि कथा अनंता का उदाहरण देते हुए कहा कि परमात्मा की लीला को कोई पार नहीं पा सकता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत पुराण में भगवान के 24 अवतारों का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि इस धरती पर जब भी धर्म की हानि होती है, तो उसकी स्थापना के लिए परमात्मा अवतार लेते हैं। भगवान संतों, गोमाता और अपने भक्तों की रक्षा के लिए विकराल रूप धारण कर लेते हैं। जैसे भगवान अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नरसिंह का रूप धारण कर पापी हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त प्रहलाद के जीवन की रक्षा की। उन्होंने कहा कि भगवान को जानने के लिए हमें भागवत पुराण की कथा को जानना होगा। यह भगवान के स्वरूप का अनुभव कराने वाला और समस्त वेदों का सार है। शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए अपना पूरा जीवन व्यर्थ गवां देता है और अंत में खाली हाथ इस लोक से चला जाता है। अगर वही मनुष्य अपने इस जीवन के दौरान सत्संग को अपनाता है तो उसे भगवान के परमधाम की प्राप्ति हो सकती है। लिहाजा हमें सच्चा सुख प्राप्त करने के लिए भगवान के सत्संग को अपने जीवन में उतारना होगा।
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