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Kathua News: तारबंदी के आगे किसानों ने की गेहूं की बुआई

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हीरानगर। भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आइबी) पर संघर्षविराम के चलते 24 वर्षों बाद तारबंदी के आगे करोल कृष्णा और करोल मात्रयां के किसानों ने खेतों में गेहूं की बुआई की। दो दशकों बाद आया यह पल किसानों के लिए बेहद खुशी का पल था। उन्होंने कहा इतने वर्षों बाद अपनी जमीन में आकर ऐसा महसूस हुआ जैसे वर्षों पहले बिछड़ी मां मिल गई और गले से लगाया है।
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3 वर्ष पहले 21 वर्षों बाद तारबंदी के आगे खेती शुरू कराने का काम जिला प्रशासन की ओर से शुरू किया गया था। दो वर्ष कृषि विभाग के सहयोग से चक चंगा और छन्न टांडा के किसानों ने तारबंदी के आगे खेती की फसल अच्छी हुई। जिस से प्रेरित होकर वीरवार को साथ लगते गांवों के किसानों ने भी तारबंदी के आगे खेती का काम शुरू कर दिया। कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में पहले दिन कुल 5 किसानों ने खेती शुरू की। अब तक तारबंदी के आगे 77 एकड़ भूमि पर गेहूं की बुवाई की जा चुकी है और लक्ष्य 200 एकड़ भूमि का है।
सीमावर्ती किसानों को तारबंदी के आगे खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पिछले 3 वर्षों से जिला प्रशासन और कृषि विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे थे। इस प्रयास के परिणाम बेहतर देखने को मिल रहे हैं और धीरे-धीरे तारबंदी के आगे खेती करने वाले किसान बढ़ते जा रहे हैं।
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जिला कृषि अधिकारी संजीव राज गुप्ता ने कहा तारबंदी के आगे खेती का सिलसिला आगे बढ़ता जा रहा है। जिला प्रशासन और विभाग के प्रयासों के बाद किसान अपनी जमीनों को आबाद करने में जुट गए हैं। इस कड़ी में आज करोल कृष्णा और करोल मात्रयां गांव के किसान भी जुड़ गए हैं। पहले दिन 5 किसानों ने गेहूं की बुवाई शुरू की। कृषि विभाग की ओर से उन्हें नई तकनीक और सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई।
उन्होंने कहा अब तक 77 एकड़ भूमि पर गेहूं की बुवाई की जा चुकी है और लक्ष्य 200 एकड़ भूमि पर इसे लगाने का है। जिस तरह से किसानों का रुझान यहां खेती की ओर बढ़ रहा है यह लक्ष्य जल्द ही पूरा होगा।
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किसान जयदेव ने कहा 24 वर्षों के बाद जब अपने खेत में कदम रखा तो ऐसा महसूस हुआ बरसो पहले बिछड़ी मां ने हाथ थाम लिया हो और जोर से गले लगाया हो। जिला प्रशासन कृषि विभाग के प्रयासों से यह संभव हुआ है जिसके लिए हम केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा निश्चित तौर पर यहां खेती शुरू होने से सीमावर्ती किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। क्योंकि बहुत से किसान ऐसे हैं जिनकी जमीने तारबंदी के आगे हैं। यह जमीन बेहद उपजाऊ है हमें उम्मीद है कि यहां बोई फसल की अच्छी पैदावार होगी।
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किसान अशोक कुमार ने कहा आइबी पर पाकिस्तान की ओर से अक्सर गोलाबारी की जाती रही है जिस वजह से सीमावर्ती किसान अपने खेतों में खेती नहीं कर पा रहे थे। लेकिन संघर्ष विराम के बाद माहौल बदला है और वर्षों से खाली पड़ी जमीनों पर हमें फिर से फसल लगाने का मौका मिला है। इसमें कोई दो राय नहीं हमारे लिए यह बेहद खुशी का पल है जब हम 24 वर्षों बाद अपने खेतों में कोई फसल बो रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करते हैं लेकिन हालात ऐसे ही बने रहे तो तारबंदी के आगे सभी खेतों में फसलें लहलहाएंगी।
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