बिलावर। मंडली गांव में जारी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा वाचक सुभाष शास्त्री ने पंडाल में पहुंचे श्रद्धालुओं को समझाया कि सत्संग से बढ़कर कोई सुख नहीं है। उन्होंने कहा कि श्री रामचरितमानस में भी कहा गया है कि अगर स्वर्ग और मोक्ष के सब सुखों को एक तराजू के पलडे़ में रखा जाए तो भी वह सब मिलकर दूसरे पलड़े पर रखे हुए उस सुख के बराबर नहीं हो सकते जो केबल क्षण मात्र के सत्संग से होता है। सत्संग सुनने से पापों का नाश होता है।
सांसारिक उपलब्धियों के लिए तो हमें बहुत समय लगाना पड़ता है और श्रम करना पड़ता है पर सत्संग को यदि एक घड़ी, आधी घड़ी, आधी की आधी घड़ी सुन लिया जाए तो इससे करोड़ों कष्ट दूर हो जाते हैं। सत्संग की इच्छा उत्पन्न होती है तो इसे भगवान की बहुत बड़ी कृपा समझना चाहिए। संसार दुखों के आधार समुद्र में डूब होता है पर सत्संग आनंद प्रदान कर आवागमन का चक्कर ही छुड़ा देता है। मनुष्य अपने पापों का प्रायश्चित करना चाहे तो बड़े-बड़े कर्मकांड करने पड़ते हैं जो सबके बस की बात नहीं है पर सत्संग से सभी पापों का निवारण अपने आप हो जाता है। इसलिए सत्संग मनुष्य को अवश्य करना चाहिए। इससे कई प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। कथा के बाद भगवान जगदीश की आरती का आयोजन किया गया, जिससे आसपास का वातावरण भक्ति में हो गया। आयोजकों ने बताया कि कथा का समापन शनिवार को विशाल भंडारे के आयोजन के साथ किया जाएगा।