कठुआ। कठुआ कैनाल सहित जिले की तमाम नहरों व कूहलों की सफाई का काम युद्धस्तर पर जारी है। जानकारी के मुताबिक एक मार्च से कठुआ कैनाल सहित अन्य सहायक नहरों व कूहलों में पानी छोड़ा जाना है। इसकी तैयारियां विभाग की ओर से कर ली गई हैं। विभाग ने अब तक लगभग 50 लाख रुपये की लागत से इस साल नहरों से गाद निकालने का काम करवाया है। इसके लिए अलग-अलग फर्मों को 36 टेंडर अलॉट किए गए हैं। इसके अलावा, नाबार्ड के तहत कठुआ कैनाल में मरम्मत का काम भी जारी है। बता दें कि अमूमन सिंचाई विभाग की ओर से नहरों में बैसाखी पर ही पानी छोड़ा जाता है लेकिन इस बार जल्दी पानी छोड़ा जाएगा।8463 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई को सुनिश्चित करेगी कठुआ कैनाल
जिले में छोटी-बड़ी दर्जनों नहरें हैं। कठुआ शहर के बीचोंबीच से होकर गुजरने वाली कठुआ कैनाल इनमें सबसे महत्वपूर्ण है, जिसकी लंबाई 17 किलोमीटर है और यह 8463 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई को सुनिश्चित करती है। इस नहर के साथ लगभग 48 किलोमीटर लंबी कूहलें भी जुड़ी हैं। वहीं जिले में अन्य 14 छोटी नहरों की सफाई का काम भी जारी है।
कठुआ कैनाल से एक हजार से ज्यादा किसान करते हैं सिचाई
नहरों में पानी छोड़ने की यह प्रक्रिया हर साल की जाती है। बारिश के अभाव में किसान बार-बार सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की मांग करते हैं। हर बार पानी छोड़ने का शेड्यूल 13 अप्रैल ही रहता है लेकिन इस बार एक महीने पहले पानी छोड़ा जा रहा है। पानी छोड़ने से पूर्व नहर में जमी गाद को निकालने के लिए इस बार भी जेसीबी का इस्तेमाल किया गया। इसके लिए कुछ स्थानों पर मरम्मत का काम भी किया गया। कठुआ कैनाल से एक हजार से ज्यादा किसानों को सिंचाई के लिए साल भर पानी मिलता है। इसके चलते कठुआ क्षेत्र में नहर की सिंचाई सुविधा होने से इसे कृषि के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। सबसे ज्यादा किसानों को सब्जी की सिंचाई के लिए इस समय पानी की जरूरत है। वहीं कई स्थानों पर अभी भी किसान गेहूं की फसल के लिए सिंचाई की मांग कर रहे हैं।
-नहरों की सफाई के लिए 36 अलग-अलग टेंडर किए गए। इन पर 50 लाख रुपये के करीब खर्च आया है। इस बार बारिश कम हुई है और मौसम भी गर्म हो चला है। सरकार ने एक मार्च से नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, अगर इस दौरान अच्छी बारिश होती है तो समय बढ़ाया जा सकता है।
-राजीव शर्मा, एक्सईएन, सिंचाई विभाग, कठुआ