कठुआ। सुकराला गांव के गुरु आश्रम में योग ध्यान साधना शिविर जारी है। कथावाचक सुभाष शास्त्री ने साधकों को ध्यान की विधि बताई। उन्होंने कहा कि ध्यान में कभी-कभी विभिन्न प्रकार का प्रकाश भी दिखाई देगा, कभी नीला, कभी सफेद कभी कोई अन्य रंग। उसे भी देखिए यह क्षणिक रहता है। फिर शरीर से मन का संबंध टूट जायेगा और मन आत्मा में अवस्थित होने लगेगा। प्रतिदिन के इस अभ्यास से थोड़े समय के बाद मिलने वाले परिणाम को आप स्वयं महसूस करने लगेंगे। इसके उपरांत उन्होंने ओम नाम का अभ्यास कराते हुए कहा कि ओम किसी जाति-धर्म और संप्रदाय का नहीं है। यह अ. उ. म अक्षरों से मिलकर बना है। यह चमत्कारिक शक्ति रखने वाला शब्द है तथा इसका उच्चारण कोई भी व्यक्ति कर सकता है। वेदों में ओम का महत्व प्रतिपादित है। गीता में ओम को साक्षात ईश्वर कहा गया है। ओम के गुंजन मात्र से मन मस्तिष्क और शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है।