- हाईवे के विस्तारीकरण में आए पक्के ढांचे तोड़ने के बावजूद नहीं मिला मुआवजा
संवाद न्यूज एजेंसी
हीरानगर। हाईवे के विस्तारीकरण और एक्सप्रेस-वे के निर्माण का कार्य दिन-प्रतिदिन तेज हो रहा है। मगर इसकी जद में आई भूमि के लिए अभी भी कुछ लोग मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं। कुछ लोग असमंजस में हैं कि उन्होंने प्रशासन के कहने पर पक्के ढांचे तोड़ना शुरू कर दिए हैं, मगर इनका मुआवजा मिलेगा या नहीं। कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने पक्के ढांचे तोड़ दिए हैं, लेकिन अभी भी उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति रोष है।
बनेड निवासी राम स्वरूप ने कहा कुछ महीने पहले राजस्व विभाग के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनकी भूमि जिस पर तीन दुकानें बनी हुई थी, जो हाईवे के विस्तारीकरण की जद में आई हैं। अधिकारियों ने कहा कि जल्द उन्हें मुआवजा मिल जाएगा, इसलिए वह दुकानों को तोड़ने का काम खुद शुरू कर सकते हैं। प्रशासन पर भरोसा करते हुए दो दुकानों को तोड़ दिया। मगर कई दिन इंतजार करने के बाद मुआवजा नहीं मिला तो अस्थायी तौर पर बैठने के लिए एक दुकान को बचा लिया है। अब स्थिति यह है कि न तो हम यहां काम कर सकते हैं और न ही यहां से कहीं और शिफ्ट हो सकते हैं। क्योंकि शिफ्ट होने के लिए पैसे की जरूरत है। जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा तो शिफ्ट कैसे होंगे। विभाग के अधिकारी भी अब टालमटोल ही कर रहे हैं।
इसी गांव के निवासी राकेश शर्मा ने कहा उनकी भी कुछ जमीन हाईवे के विस्तारीकरण में आई है और जहां पर सड़क बनाने का काम लगभग अंतिम चरण पर पहुंच गया है लेकिन अभी तक मुआवजे की राशि नहीं मिली है। अगर सड़क बनने के बाद भी मुआवजा नहीं मिला तो हम कहां भटकते रहेंगे। इसलिए प्रशासन को सड़क का काम पूरा होने से पहले हमें मुआवजा देना चाहिए। इसी गांव में और भी कुछ लोग हैं जिनके घर सड़क की जद में आने के बाद तोड़े जा चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला है।
इस संदर्भ में राजस्व विभाग की ओर की जा रही कार्रवाई के बारे में जानकारी लेने के लिए हीरानगर के एसडीएम को कई बार मोबाइल पर संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।