कठुआ। जीएमसी कठुआ का इमरजेंसी ब्लॉक और ओपीडी नई बनी इमारत में मार्च के पहले सप्ताह शिफ्ट हो जाएगी। इससे जीएमसी में बेड की संख्या 300 से बढ़कर 500 हो जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इमारत का काम पूरा है। मशीनें भी इंस्टाल हो चुकी हैं। ऑक्सीजन प्लांट का काम पूरा कर लिया गया है और वायरिंग का काम भी पूरा हो चुका है। फिल्हाल, एक्स-रे मशीन का एक प्वाइंट बाकी है, जिसे शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद नई इमारत में कीमोथेरेपी, त्वचा विभाग, मनोचिकित्सक, जनरल मेडिसिन की ओपीडी शुरू कर दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में ओपीडी वाला स्थान कम है। इससे मरीजों और स्टाफ को भी दिक्कत पेश आती है। बता दें कि मौजूदा इमरजेंसी वार्ड में 5 से 6 बेड ही उपलब्ध हैं लेकिन अब नई इमारत वाली इमरजेंसी में 20 बेड, 10 बेड आब्जर्वेशन वार्ड और 10 ट्राइएज के उपलब्ध होंगे। इनमें अधिकतर बेड सेंटर ऑक्सीजन सप्लाई से जुड़े रहेंगे।
रोजाना जीएमसी में पहुंच रहे एक हजार से 1500 मरीज
जीएमसी में जिला व आसपास के क्षेत्र से रोजाना एक हजार से 1500 लोग ओपीडी में पहुंच रहे हैं। नई इमारत और सुविधाओं में विस्तार के बाद ओपीडी में बढ़ोतरी होगी। जीएमसी कठुआ की नई इमारत की नींव पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने सितंबर 2019 में रखी थी। कोरोना महामारी के चलते काम प्रभावित हुआ और पूरा प्रोजेक्ट लटक गया लेकिन अब काम पूरा कर लिया गया है। इस प्रोजेक्ट पर 30 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
नई इमारत में मिलेंगी ये सुविधाएं
जीएमसी की 200 बेड की नई इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर 20 इमरजेंसी बेड, 10 आब्जर्वेशन बेड और 10 ट्राइएज बेड की सुविधा होगी। इसके अलावा 2 इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर के साथ ही तीन अलग-अलग क्षमता के एक्स-रे प्लांट भी होंगे। ग्राउंड फ्लोर में ही एमआरआई, सिटी स्कैन, लेक्रोस्कोपी व अल्ट्रासाउंड की सुविधा रहेगी। इसके अलावा, पूरा रेडियोलॉजी विभाग इसी ब्लॉक से काम करेगा। इसके बाद पहले फ्लोर पर ही 50 बेड की सुविधा के साथ वार्ड उपलब्ध होंगे।
पार्किंग की समस्या भी होगी दूर
मौजूदा समय में जीएमसी कठुआ में दाखिल होते ही सबसे पहले इमरजेंसी ब्लॉक है। वाहनों का जमावड़ा होने के कारण पार्किंग के लिए मरीज और तीमारदारों के अलावा स्टाफ को भी परेशानी पेश आती थी। इमरजेंसी ब्लॉक के अलग ब्लॉक में शिफ्ट हो जाने से पार्किंग से लेकर अन्य समस्याएं भी दूर हो जाएंगी। ऐसे में अस्पताल की अन्य सेवाओं को सुचारू रखा जा सकेगा।
ऑक्सीजन की नहीं होगी कमी, 300 एलपीएम का प्लांट शुरू
अधिकारियों ने बताया कि नई इमारत तक ऑक्सीजन पाइपलाइन पहुंचाना चुनौती से कम नहीं था। उसके बाद ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर बनाए रखना भी मुश्किल लग रहा था लेकिन अब समाधान हो गया है। वहीं, निजी संस्था के सहयोग से 300 एलपीएम क्षमता का ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट भी स्थापित हो गया है।
-इमारत का निर्माण पूरा कर लिया गया है। महज एक्स-रे मशीन को बिजली का कनेक्शन देना बाकी है। एक-दो दिन में उसे भी करवा लिया जाएगा। ज्यादा से ज्यादा 1 से 5 मार्च तक नई इमारत में सारा ओपीडी और इमरजेंसी शिफ्ट हो जाएगी। इससे जीएमसी की स्वास्थ्य सुविधाओं में एक नया अध्याय शुरू होगा। -डॉ. सुरिंदर अत्री, प्रिंसिपल, जीएमसी, कठुआ।