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Kathua News: एक बार पहनी आजाद हिंद फौज की वर्दी, फिर ताउम्र नहीं बदला लिबास

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हीरानगर। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की धरोहर आज भी हमें प्रेरित करती है। इस धरोहर को संजोय रखने में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसा ही एक परिवार हीरानगर के गुड़ा मेहतेयां में भी है, जिनके सदस्य स्वतंत्रता संग्राम के नायकों में शामिल रहे हैं।
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यह परिवार है आजाद हिंद फौज के जवान और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से ताम्रपत्र से सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी गिरधारी लाल का। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आजाद हिंद फौज की वर्दी पहनी तो आजादी के बाद घर लौटने के बाद आखिरी सांस तक कोई दूसरा लिबास नहीं अपनाया।
उनके पोते सन्नी शर्मा ने स्वतंत्रता संग्राम में अपने दादा के संघर्ष की कहानी साझा करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानी का जीवन कठिनाइयों से भरा था। उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उनके बुलंद हौसले और बहादुरी ने देश को स्वतंत्रता दिलाई। उन्होंने कहा कि उनके दादा का जीवन एक प्रेरणा है। आज भी हमारे परिवार को उनके नाम से जाना जाता है, जो हमारे लिए फक्र की बात है। आजादी के बाद घर वापस आने के बाद पूरी उम्र उन्होंने आजाद हिंद फौज की वर्दी ही पहनी। छाती पर हमेशा मेडल लटके रहते थे और वह शान से इसी वर्दी में गांव में या इलाके में घूमते थे। वर्ष 2001 में उनका देहांत हो गया। उन्होंने कहा वह हमेशा लोगों को भी देशभक्त के लिए प्रेरित करते थे और उसी का एक उदाहरण छप्पड़ मोड़ में हाईवे किनारे उनकी तरफ से लगवाई गई नेता जी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा है, जो आज यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि गुलामी के दौर के जो किसे उन्हें दादा ने सुनाए हैं, उनकी कल्पना भर करने से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आज हम पूरी आजादी से रह सकते हैं, खा सकते हैं, पहन सकते हैं, बोल सकते हैं और विकसित देश में मिल रही सुविधाओं का आनंद ले सकते हैं। यह सब इन्हीं की बदौलत है।
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