कठुुआ। उज्ज ने सोमवार को सीजन के सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए जमकर कहर बरपाया। दरिया का बहाव 1.80 लाख क्यूसेक को पार कर गया। प्रशासन ने एहतियातन निचले इलाकों को खाली करवाने का अलर्ट जारी कर दिया। देखते ही देखते रौद्र रूप में आए उज्ज ने कई मकानों और बस्तियों को भी जद में ले लिया। कई परिवारों को पलायन करना पड़ा। बिलावर सब डिवीजन के इलाकों में भारी बारिश के कुछ ही घंटों के बाद निचले इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए। सोमवार दोपहर बाद उज्ज की बाढ़ खतरे के निशान को पार करने के बाद प्रशासन ने चक छिब्बा, खंदवाल और कोट पुन्नू के इलाकों में भी लोगों को अलर्ट कर दिया। राजबाग उज्ज पुल के नजदीक बाढ़ की जद में फंसे गुज्जर समुदाय के दो सदस्यों को वायुसेना ने देर शाम रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। गुज्जर समुदाय के पांच और सदस्यों ने बाढ़ के बीच सुरक्षित जगह पर शरण ली। बिलावर में उज्ज पुल बरोटा के नजदीक दरिया में गए छह लोगों को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू किया गया।
डीसी राहुल पांडेय और एसएसपी रमेश चंद्र कोतवाल भी घटनास्थल का जायजा लेने पहुंचे। सेना की 41 फील्ड बटालियन ने बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए इंतजाम सुनिश्चित किए। देर शाम तक वायुसेना के दो चॉपरों ने कमान संभालते हुए गुज्जर समुदाय के दो लोगों सुरक्षित बाहर निकाला।
बाढ़ नियंत्रण विभाग के कार्यकारी अभियंता एफआर भगत ने बताया कि खंदवाल में एक कच्चा मकान बाढ़ की चपेट में आ गया। बेरिल में भी सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन को नुकसान पहुंचा है। बताया कि फोरलेन में भी उज्ज दरिया ने नुकसान पहुंचाया है। भंवबड़वा इलाके में गुज्जर बस्ती के परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा तरनाह दरिया भी सोमवार को खतरे के निशान से ऊपर बहता रहा। उधर, बिलावर, बसोहली, महानपुर, रामकोट आदि पहाड़ी इलाकों में कई सड़कें बह गई हैं। 48 घंटे से कई गांव के सड़क संपर्क टूट गए है। विभागीय अमला इनकी बहाली मेें जुटा हुआ है।