कठुआ। जम्मू संभाग में चार मुख्य मेडिकल कॉलेजों में साल 2020-21 में शुरू हुए विज्ञान स्नातक में पैरामेडिकल पाठ्यक्रम पांच साल में भी पूरा न होने के चलते हजारों विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
जेके बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एग्जाम के बाद शुरू हुए पैरामेडिकल पाठ्यक्रम प्रथम बैच के विद्यार्थी अब तक सिर्फ दूसरे साल की ही परीक्षा दे पाए हैं, जबकि दूसरे साल की परीक्षाओं के परिणाम और तीसरे साल के लिए होने वाली परीक्षाओं का विद्यार्थी एक साल से इंतजार कर रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि इस बैच काे बीते वर्ष मार्च तक डिग्री पूरी कर कॉलेज से बाहर चले जाना चाहिए था लेकिन जम्मू विश्वविद्यालय देरी के चलते विद्यार्थी अभी भी तीसरे साल की परीक्षाओं का ही इंतजार कर रहे हैं।
इस मामले में अपना नाम न छापने की शर्त पर विद्यार्थियों ने बताया कि उनकी जो डिग्री साढ़े तीन साल मेें ही पूरी हो जानी चाहिए थी, वह पांच साल बीत जाने के बाद भी अधूरी है। उन्होंने कहा कि पैरामेडिकल पाठ्यक्रम में डिग्री प्राप्त करने में हो रही देरी के लिए सिर्फ कॉलेज प्रशासन और जम्मू विश्वविद्यालय जिम्मेदार हैं। जो परीक्षाएं पिछले साल अगस्त-सितंबर में आयोजित हो जानी चाहिए थीं, वे अब तक नहीं हुई हैं। यह जम्मू विश्वविद्यालय की देरी का ही परिणाम है कि पैरामेडिकल के प्रथम बैच (2020-21 में शुरू हुआ) की दूसरे साल की परीक्षाओं के परिणाम भी अभी आना बाकी हैं। इसके चलते छह महीने की इंटर्नशिप रुकी हुई है, जो क्लास वर्क के बाद हर विद्यार्थी के लिए अनिवार्य है।
विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि जम्मू संभाग के सभी मेडिकल कॉलेजों का प्रशासन इस देरी के लिए जम्मू विश्वविद्यालय और कोरोना को जिम्मेदार बता रहा है। विद्यार्थियों का कहना है कि कोरोना सिर्फ जम्मू संभाग में ही नहीं फैला हुआ था। इस महामारी से कश्मीर भी उतना ही प्रभावित था लेकिन कश्मीर विश्वविद्यालय ने कोरोना काल के बाद समय रहते परीक्षाओं का आयोजन कर और उनकी परीक्षाओं के परिणाम भी घोषित भी किए हैं। इन्हीं कॉलेजों का दूसरा बैच इंटर्नशिप करने के बाद पास आउट होने के लिए तैयार है।
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परिणामों में देरी के चलते विद्यार्थियों को नौकरी को लेकर है शंका
जम्मू संभाग के छात्रों का कहना है कि कुछ ही दिनों में कश्मीर संभाग के पैरामेडिकल के विद्यार्थियों के हाथ में डिग्री होगी क्योंकि कश्मीर विश्वविद्यालय जल्द ही फाइनल साल के परिणाम घोषित करने वाला है। ऐसे में अगर स्वास्थ्य विभाग पैरामेडिकल के संबंधित प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पदों को प्रकाशित करता है तो इसका सिर्फ कश्मीर संभाग के विद्यार्थियों को फायदा होगा।
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कठुआ, राजोरी और डोडा मेडिकल कॉलेजों में हर साल 60 और जम्मू में 100 विद्यार्थी लेते हैं दाखिला
कठुआ, राजोरी और डोडा के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में हर वर्ष पिछले चार सालों 60 विद्यार्थी बीएससी पैरामेडिकल पाठ्यक्रम के तीन विषयों में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (एमएलटी), रीनल डायलिसिस और ऑपरेशन थियेटर टेक्नोलॉजी दाखिला ले रहे हैं। जम्मू मेडिकल कॉलेज में प्रत्येक वर्ष करीब 100 विद्यार्थी प्रवेश लेते हैं। समय पर परीक्षाएं न होने के चलते साढ़े तीन साल की डिग्री पांच सालों में पूरी नहीं हो पा रही है। इसको लेकर विद्यार्थियों को अपने भविष्य में असमंजस बना हुआ हैं।
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परीक्षाओं का मूल्यांकन करने के लिए हर कॉलेज को शिक्षकों का पैनल भेजना होता है। विश्वविद्यालय ने पहले इस तरह के विषय लांच नहीं किए थे। इसके चलते देरी हो रही है। मेडिकल कॉलेजों के प्रशासन को बार-बार सूचना देने के बाद भी अभी तक कोई शिक्षकों का पैनल जम्मू विश्वविद्यालय नहीं पहुंचा है। इसको लेकर परीक्षाओं के परिणाम में देरी हो रही है। अब विश्वविद्यालय ने अपने से ही स्तर पर शिक्षकों का प्रबंध कर परीक्षाओं का मूल्यांकन करवाना शुरू कर दिया है। लिहाजा अब अगले 20 दिनों तक परिणाम घोषित हो जाएंगे।
-संजीव महाजन, कंट्रोलर एग्जामिनेशन जम्मू यूनिवर्सिटी
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कोरोना काल शुरू होने से कुछ देर पहले इन विषयों को लेकर डिग्री करवाना शुरू किया था क्योंकि यह सभी नए विषय हैं। इसको लेकर कुछ समय लग रहा है लेकिन कॉलेज प्रशासन पूरी कोशिश कर रहा है और जम्मू विश्वविद्यालय के भी संपर्क में है ताकि जल्द से जल्द प्रथम वर्ष के बैच के परीक्षाओं को आयोजन कर विद्यार्थियों को उनकी डिग्री उपलब्ध करवाई जाए। सारी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित कर रहे हैं और जल्द इसके परिणाम सामने होंगे।
-सुरिंद्र अत्री, प्रधानाचार्य गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज कठुआ