कठुआ। जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे के विस्तारीकरण और दिल्ली-अमृतसर-कटड़ा एक्सप्रेस-वे के काम के बीच नियमों के विरुद्ध चलने वाले ई रिक्शा हादसों का कारण बन रहे हैं। बीते सात महीनों में दर्जनों लोग घायल भी हो चुके हैं।
हाईवे पर जगह-जगह रूट डायवर्जन और सिंगल लेन से वाहनों की आवाजाही के बीच ई रिक्शा चालक लोगों की जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। इनमें शहर मेंं दौड़ने वाले ई रिक्शा के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों से शहर को जोड़ने वाले हाईवे पर ये ई रिक्शा दिन भर दौड़ते देखे जा सकते हैं। इससे हादसों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। यातायात और परिवहन विभाग की नाक तले ई रिक्शा शहर के व्यस्ततम कॉलेज मार्ग से लेकर मुख्य बाजार और मुख्य सड़कों पर भी सरपट दौड़ते हैं। यहां तक कि हाईवे पर भी इन्हें दिनभर सरेआम देखा जा सकता है, जबकि इन्हें हाईवे पर चलाए जाने की अनुमति ही नहीं है।
कठुआ शहर में डीजल ऑटो का विकल्प और शहर के अंदरूनी हिस्सों में यातायात का बेहतर साधन माने जा रहे ई रिक्शा कालीबड़ी चौक, राजकीय डिग्री कॉलेज, शहीदी चौक के साथ-साथ मुखर्जी चौक के मोड़ पर अब जाम की भी मुख्य वजह बनने लगे हैं। हद तो यह है कि पिछले कुछ समय से इन ई रिक्शा को अब स्कूली बच्चों को स्कूल लाने ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। सुबह और दोपहर के समय हाईवे पर बच्चों को बैठाकर ये सरपट दौड़ते पाए जा सकते हैं।
शहर की सड़कों पर दौड़ रहे 500 से अधिक ई रिक्शा
कठुआ शहर की सड़कों पर क्षमता से अधिक दौड़ रहे ई रिक्शा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को भी बदहाल कर रहे हैं। इसके अलावा पहले सवारी उठाने की होड़ हादसों का कारण बनती जा रही है। करीब तीन साल पहले तक शहर में इक्का-दुक्का ई रिक्शा चलते थे। लेकिन, अब इनकी संख्या 500 से अधिक हो चुकी है। इसके अलावा, कॉलेज रोड पर ई-रिक्शा के कारण होने वाले हादसों में भी इजाफा हुआ है। जिम्मेदार विभाग आरटीओ कार्यालय को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
न कोई रूट तय, न किराया और न कोई स्टैंड
शहर में ई रिक्शा के कारण बन रही अव्यवस्था का बड़ा जिम्मेदार आरटीओ कार्यालय है क्योंकि ई रिक्शा के लिए न तो कोई स्टार्ट प्वाइंट है और न ही ठहराव का कोई निश्चित स्थान तय है। रूट प्लान भी नहीं है। किराया भी तय नहीं है। नतीजा यह है कि सवारी न मिलने पर ये ई रिक्शा शहर की सड़कों पर ही पार्क कर दिए जाते हैं। ट्रैफिक पुलिस भी मानती है कि ई रिक्शा को शहर के भीतरी इलाकों या तंग गलियों में लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया है। जहां परमिट वाले वाहन चलते हैं, वहां इन ई रिक्शा को चलने की इजाजत नहीं है लेकिन ई रिक्शा चालकों की मनमर्जी लोगों के लिए दिक्कतें बढ़ा रही है।
जिले में रजिस्टर हैं 1780 ऑटो और ई-रिक्शा
आरटीओ कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में 957 थ्री व्हीलर (ऑटो) और 823 ई रिक्शा रजिस्टर हैं। इनमें से 35 फीसदी यानी 500 से अधिक ई रिक्शा शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसके अलावा जिले में 849 मैक्सी कैब भी रजिस्टर हैं।
-समय-समय पर कानून का पालन न करने वाले ई-रिक्शा चालकों पर कार्रवाई की जाती है। बीते माह ही हाईवे पर ई रिक्शा चलाने वाले चालकों के लिए 26 चालान किए गए हैं। भविष्य में भी अगर ई रिक्शा चालक हाईवे पर निकलते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। -वीरेंद्र कुमार सिंह, डीटीआई, कठुआ
हाईवे पर हुए प्रमुख हादसे
सितंबर 2023-जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर लोगेट मोड़ के पास एक ई रिक्शा को पीछे से आ रहे ट्रोल की टक्कर लगने से ई रिक्शा चालक सहित उस पर सवार तीन यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।
अगस्त 2023- कठुआ रेलवे स्टेशन से आ रहे एक ई-रिक्शा के पलटने से उसमें सवार तीन महिला यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
नवंबर 2023 -नेशनल हाईवे स्थित लोगेट मोड़ पर खड़े ट्रक पर ई रिक्शा टकरा गया था। इसमें तीन लोग घायल हुए थे।
अप्रैल 2024 -बरवाल में ई-रिक्शा लोड कैरियर में जा घुसा, इसमें एक व्यक्ति घायल हो गया था।
अप्रैल 2024-बिलावर में टिल्ला बाथर सड़क पर एक ई रिक्शा अनियंत्रित हो गया था। इससे जिसमें सवार तीन लोग घायल हो गए थे।
अप्रैल 2024:-कालीबड़ी के पास ई रिक्शा पलटने से एक व्यक्ति घायल हो गया था।