कठुआ के विधायक डॉ. भारत भूषण ने अग्निबाण से पूरी करवाई पुतलों के दहन की परंपरा
भगवान राम के जयकारों से रामलीला मैदान का माहौल हुआ भक्तिमय
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। विजयादशमी का त्यौहार शनिवार को जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया। समारोह में कठुआ के विधायक डॉ. भारत भूषण विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने अग्निबाण से रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन करने की परंपरा पूरी करवाई।
दोपहर के समय रामलीला मैदान युद्ध क्षेत्र में तो दशहरे के बाद अयोध्या में तब्दील हो गया। रामलीला मैदान में भगवान राम के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। रावण के वध के बाद रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले जलाए गए। भगवान राम ने अग्निबाण छोड़कर तीनों पुतलों को आग लगाई। जिला उपायुक्त ने कहा कि देश में कई तरह के रावण है। कुरीतियों के साथ-साथ समाज में फैली बुराइयों के खिलाफ लोगों को एकजुट होकर लड़ना है। शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी दशहरे का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
प्रभु श्रीराम ने किया रावण का अंत
दशहरा पर्व पर राम रावण युद्ध दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। युद्ध के दृश्य को दोपहर बाद मंचित किया गया। इस दौरान राम की वानर सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध हुआ। दोनों ओर से बाणों के खूब प्रहार हुए। विभीषण द्वारा राज बताए जाने के बाद राम ने रावण का वध किया और साथ ही लंका पर विजय पताका फहराई।
राम-रावण युद्ध देखने के लिए आए दर्शकों ने युद्ध क्षेत्र को पास से अनुभव किया। कलाकारों ने युद्ध कौशल और संवादों के साथ भावनाओं को इस तरह से पेश किया गया कि रामलीला मैदान युद्ध क्षेत्र में तबदील नजर आया। दोनों ओर से बाणों की वर्षा के बीच भगवान राम ने रावण के सिर को धड़ से अलग कर दिया। मगर अगले ही क्षण रावण का सिर धड़ पर आ गया और युद्ध फिर शुरू हो गया। राम ने रावण के सिर को दस बार अलग किया, लेकिन हर बार सिर जुड़ने के साथ युद्ध आरंभ हो जाता। अंत में विभीषण ने रावण को मारने का राज बताया। इसके बाद एक ही बाण से राम ने रावण को मार दिया।
झूले और खानपान के स्टाल बने आकर्षण का केंद्र
रामलीला मैदान में विजयादशमी मेले में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन देखने को हजारों लोगों का हुजूम उमड़ा। मेले के दौरान मैदान में लगाए गए विभिन्न झूले बच्चों के विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कतारों में खड़े बच्चे झूलों पर बैठने के लिए इंतजार करते दिखे। जॉइंट व्हील, स्विंगिंग वोट, रोलर कोस्टर व स्प्रिंग बोर्ड पर चढ़ने को लेकर बच्चों से लेकर व्यस्क खासे लालायित दिखे। निशानेबाजी व अन्य खेलों में भी बच्चे व युवा किस्मत आजमाते देखे गए। खाने-पीने के विभिन्न स्टालों पर भी खासी भीड़ जुटी रही। महिलाओं को मैदान में मनियारी का सामान खरीदने की होड़ रही। मैदान में लगे खिलौनों की खरीदारी को लेकर भी बच्चे अभिभावकों से जिद करते देखे गए। झूला आपरेटर ने बताया कि वो हर वर्ष दशहरे और दिवाली के अवसर पर वो रामलीला मैदान में झूले स्थापित करते हैं। लेकिन इस बार के मेले में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
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अंतिम दिन राम-रावण में हुआ भयंकर युद्ध
बसोहली। कला नगरी बसोहली में रामलीला के अंतिम दिन राम और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ। रात के समय रावण सहायता लेने के लिए पाताल नरेश अहिरावण के पास जाता है, जो मायावी विद्या में कुशल है। अहिरावण रावण की मदद करने को तैयार हो जाता है और वह मायावी विद्या के सहारे राम लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल लोक ले जाता है, तथा यह राम लक्ष्मण की बलि पाताल देवी के समक्ष देने की तैयारी करता है। हनुमान पाताल लोक पहुंच कर अहिरावण का वध कर राम लक्ष्मण को वहां से छुड़ा लाते हैं। तत्पश्चात राम-रावण युद्ध में प्रभु राम आग्नेय वाण से रावण की नाभि में स्थित अमृतकुंड को सुखाकर रावण का वध कर देते है। अंतिम दिन रावण कुंभकरण तथा मेघनाद का दाह संस्कार कर विभीषण को लंका का राजा बना सीता सहित वापस लौटने के दृश्यों का मंचन किया गया। राजतिलक की झांकी ने दर्शकों का मन मोह लिया।