रामेश्वर धाम में आयोजित सत्संग के दूसरे दिन संत सुभाष शास्त्री ने प्रवचन से संगत को निहाल किया। प्रवचन के दौरान संत ने कहा कि मनुष्य को मोहमाया को छोड़कर वास्तविक जीवन में सफलता के लिए यत्न करने चाहिए। उस लक्ष्य के लिए यत्न करना चाहिए और उसे प्राप्त करने के लिए सत्य के मार्ग पर चलकर पुरजोर कर्म करने चाहिए। मानव अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए धन अर्जित करता है, परंतु इच्छाओं की कोई सीमा नहीं होती। इन इच्छाओं पर मानव जितना नियंत्रण रखेगा, उतना ही सुखी रहेगा। माया इंसान के दुखों का भी कारण बनती है। संवाद