कठुआ। हाईवे के साथ-साथ लिंक मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर भी आए दिन हादसों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। शहरी सड़कों पर जहां वाहनों की संख्या जाम की स्थिति बनाती है तो हाईवे में गड्ढों की संख्या हादसों में इजाफा कर रही है।
इसके साथ ही लिंक मार्गों को जोड़ने के लिए बनाए गए स्थान भी सुरक्षित नहीं हैं।जिला अस्पताल में पिछले दो साल में ही डेढ़ हजार से अधिक लोग विभिन्न सड़क हादसों में घायल हो चुके हैं। पिछले साल (2016) में जहां प्रति माह 85 लोग घायल हुए तो वर्ष 2017 में भी 65 लोग प्रति माह सड़क हादसों में घायल हुए हैं।
वर्ष 2016 में जहां अधिकतम 116 लोग एक माह में सड़क हादसों में घायल हुए तो वर्ष 2017 में भी 113 लोग सड़क हादसे की भेंट चढे़ हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या सड़कों का जाल भी वाहनों की संख्या में कमी नहीं जा पाया या फिर चालकों की लापरवाही ही एक मात्र कारण है। बरहाल सड़क हादसों की हर माह की संख्या ने स्थिति को चिंता का विषय बना दिया है।
मरने वालों की संख्या एक दर्जन से अधिक
सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या इस वर्ष पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक रही है। वर्ष 2016 में मरने वालों की संख्या दर्जन भर के करीब है। वर्ष 2017 में मरने वालों की संख्या भी एक दर्जन से कुछ अधिक है। ऐसे में हर माह एक व्यक्ति से कुछ अधिक की औसत से लोगों की मौत हुई है। सड़क हादसों की बढ़ती संख्या और यातायात नियमों के उल्लंघन का गठजोड़ कब थमेगा, यह भी चिंता का विषय है।