कठुआ। शहर से सटे भरमौरा इलाके के मकान में स्पेयर पार्ट्स तैयार करने के लिए नाबालिग बच्चों से काम करवाने का मामला प्रकाश में आया है। डीसी डॉ. राघव लंगर की अध्यक्षता में गठित प्रशासनिक टीम ने मंगलवार दोपहर दबिश देकर 12 नाबालिग बच्चों को मुक्त करवाया, जिनमें दो बच्चियां भी शामिल हैं। वहीं, पुलिस ने ठेकेदार को गिरफ्तार किया है। मुक्त करवाए गए सभी बच्चे पश्चिमी बंगाल के बताए जा रहे हैं, जो दो से छह माह से कठुआ के भरमौरा इलाके के उक्त घर में काम कर रहे थे।
चाइल्ड लाइन कठुआ की ओर से मिली शिकायत के बाद डीसी ने प्रशासनिक टीम का गठन किया। इसमें सहायक आयुक्त श्रम विभाग, तहसीलदार, स्वास्थ्य विभाग की टीम, चाइल्ड लाइन की टीम, चाइल्ड प्रोटेक्शन अधिकारी, चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी और पुलिस शामिल रही। जानकारी के अनुसार दोपहर साढ़े तीन बजे के करीब टीम ने दबिश दी। इस दौरान पाया कि 16 में से 12 नाबालिग कार्य कर रहे हैं, जिन्हें मुक्त करवा कर चिकित्सीय जांच के लिए जिला अस्पताल लाया गया। उधर, पुलिस ने मामले में जयंत कुमार निवासी पश्चिम बंगाल को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
डीसी ने बताया कि वार्ड 21 में चाइल्ड लेबर की सूचना मिली थी, जिसके बाद एक टीम गठित कर कार्रवाई की गई है। मामले की जांच की जा रही है। बताया कि मेडिकल के बाद उन्हें बाल आश्रम या नारी निकेतन में रखा जाएगा। फिल्हाल उम्र की जांच करवाई जा रही है।
पहला नहीं है मामला
शहर में जिन स्पेयर पार्ट्स को बनाने के काम में नाबालिग को लगाया गया था। यह मामला नया नहीं है। कुछ वर्ष पूर्व अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी एक अभियान चलाकर ऐसे बच्चों को मुक्त करवाया था। वहीं, जिन स्पेयर पार्ट्स को रिहायशी इलाके में ठेके पर तैयार किया जा रहा था यह कठुआ औद्योगिक क्षेत्र की ही एक इकाई में दिए जाते रहे हैं। ऐसे में उक्त इकाई प्रबंधन की गतिविधियां भी सवालों के घेरे में हैं जो मामले में सीधे तौर पर बचने के लिए ठेकेदारी पर काम देकर उन्हें आसपास के रिहायशी इलाकों में काम करवाते हैं। पहले भी हटली मोड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के रिहायशी इलाके में इस तरह का काम होता रहा है।