ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह बने हालात पर चर्चा थमी
जिले में कहीं भी ड्रोन और मिसाइलें नहीं दिखी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम के बाद शहर में जीवन पटरी पर लौट आया है। रविवार को अवकाश के बावजूद बाजारों में आम दिनों की तरह रौनक तो नहीं दिखी, लेकिन लोग चिंतामुक्त दिखे। शहर में सुबह लगने वाला संडे बाजार हर रविवार की तरह ही लगा, जहां कपड़े, जूते, चपल, आर्टिफिशियल ज्वेलरी की दुकानें सजी दिखी।
लोगों ने चिंता मुक्त होकर खरीदारी की। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह बने हालात पर चर्चा थमी दिखाई दी। इस दौरान लोग खेतों में काम करते दिखे। बता दें कि शनिवार शाम 5 बजे से शुरू हुआ युद्ध विराम के बाद जिले में कहीं से भी ड्रोन और मिसाइलें नहीं देखी गई। जिससे लोगों ने राहत की सांस ली है। इस बारे में अलग-अलग वर्गों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। जिसमें कुछ लोग ने शांति की वकालत की तो किसी ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए शुरू किए गया ऑपरेशन सिंदूर को अचानक बंद करने पर आलोचना की है।
युद्ध समस्याओं का समाधान नहीं, बल्कि खुद एक समस्या है। जम्मू-कश्मीर में 90 के दशक से चले आ रहे आतंकवाद से निपटने के लिए हमेशा हमने बंदूक का सहारा लिया, लेकिन उसका परिणाम कभी भी ऐसा नहीं रहा कि हम कह सकें कि समस्या का समाधान कर लिया है। सभ्य समाज में बंदूक से कोई हल नहीं निकल सकता है। अब युद्ध विराम हो गया है। उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही इस मसले का बातचीत से कोई समाधान निकालेंगे।
- इंद्रजीत कौर, गृहिणी
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युद्ध किसी भी देश के लिए अच्छा नहीं होता है, लेकिन अगर उसे शुरू किया है तो अंजाम तक भी पहुंचना चाहिए था। भारत की ओर से शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर अमेरिका की मध्यस्थता के बाद खत्म कर दिया गया है। इसमें अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए था। अमेरिका का हस्तक्षेप किसी को भी पसंद नहीं आया। अगर सरकार ने स्वयं निर्णय लेकर युद्ध शुरू किया तो उसे खुद ही खत्म करना चाहिए था। सरकार युद्ध को अंजाम तक लेकर जाने के बाद युद्ध विराम किया होता तो अधिक प्रसन्नता होती।
- दीपक कुमार, युवा
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पहलगाम की घटना के बाद अगर भारत ने पहल की थी तो पाकिस्तान को 1971 की याद दिलानी चाहिए थी। इससे पहले किसी भी तरह का युद्ध विराम नहीं किया जाना चाहिए था। आतंकवाद से त्रस्त भारत के हर नागरिक, राजनीतिक दल और संगठनों सभी ने सरकार का इस मामले में समर्थन दिया था। सरकार को इस मौके का फायदा उठाया जाना चाहिए था। क्योंकि पाकिस्तान को जब तक उसके गुनाहों की सजा नहीं दी जाएगी, तब तक वह सुधारने वाला नहीं है।
- कस्तूरी लाल गुप्ता, दुकानदार
ड्रोन युद्ध से आतंकवाद का सफाया नहीं हो सकता। इसका सुबूत इजरायल की हमास पर कार्रवाई को देखकर लगाया जा सकता है। आतंकवाद पर नियंत्रण के लिए सरकार को अलग से विचार करना होगा। जहां तक युद्ध विराम का विषय है तो यह भारत और पाकिस्तान के दोनों ही देशों के आवाम के लिए बेहतर फैसला है।
- दर्शन कुमार शर्मा, वरिष्ठ नागरिक