कठुआ। मचैल माता की छड़ी यात्रा शुक्रवार को बनी से ढोल नगाड़ों के बीच बनी से रवाना हुई।
छड़ी यात्रा बस स्टैंड से डागर पुल तक पैदल पहुंची। करीब घंटे भर के इस कार्यक्रम के दौरान माता के जयकारे गूंजते रहे। बाद में छड़ी के साथ जाने वाले श्रद्धालु भजन कीर्तन एवं जयघोष करते मचैल माता के दरबार के लिए रवाना हुए। छड़ी जिस रास्ते से भी निकली, श्रद्धालुओं का भव्य स्वागत किया गया। यात्रा शुक्रवार रात किश्तवाड़ रुकेगी। छड़ी 28 जुलाई को माता के दरबार पहुंचेगी। मचैल यात्रा 25 जुलाई से शुरू हो गई थी। मचैल माता का मंदिर काष्ठ का बना हुआ है। इस मंदिर के मुख्य भाग में समुद्र मंथन का आकर्षक और कलात्मक दृश्य अंकित है। मंदिर के बाहरी भाग में पौराणिक देवी-देवताओं की मूर्तियां लकड़ी की पट्टिकाओं पर बनी हुई हैैं। मंदिर के भीतर मां चंडी एक पिंडी के रूप में विराजमान हैं। यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं की संख्या भी हर वर्ष बढ़ती ही जा रही है।