बिलावर। काली माता मंदिर चौगान में 21 कुंडीय रुद्र महायज्ञ जारी है। बुधवार को रुद्र यज्ञ के छठे दिन सबसे पहले श्रद्धालुओंं ने हवन यज्ञ में आहुतियां डालकर विश्व मंगल की कामना की। कथावाचक मनोहर लाल शास्त्री ने भगवान आशुतोष की महिमा का वर्णन किया।
उन्हाेंने बताया कि भगवान शिव को आशुतोष के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि आशु का मतलब होता है तुरंत और तोश का मतलब होता है तुष्ट होने वाला अथवा प्रसन्न होने वाला। कथाचाचक ने कहा कि भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों की प्रार्थना से तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं, इसलिए उन्हें आशुतोष भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव महज जल के अभिषेक से ही खुश हो जाते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए कुछ और करने की जरूरत नहीं पड़ती है। मनोहर लाल शास्त्री ने बताया कि जब भी कोई सच्चे मन और कठोर भाव से भगवान शिव की आराधना करता है और उनसे कोई वरदान की मांग करता है तो भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। यही कारण है कि उन्हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान शिव का एक अन्य स्वरूप है अर्धनारीश्वर। इसका तात्पर्य आधा नर और आधा नारी से है। इस बारे में पौराणिक कथा में भी कहा गया है कि भगवान के सामने नर-मादा के बीच कोई अंतर नहीं है। जैसे भगवान विष्णु ने पुरुष के रूप में कई लीलाएं कीं, उसी प्रकार वे मोहिनी रूप में नारी बनकर आए। इसी तरह भगवान शिव के भी कई अंशावतार हैं, उन्होंने भी नारी स्वरूप धरा था, जिस वजह से उन्हें अर्धनारीश्वर भी कहा गया है।