बिलावर। टिल्ला देवल गांव में आयोजित रामलीला में सोमवार की रात को मंचन की शुरुआत हनुमान जी के लंका दहन कर लौटने से हुई।
मंचन की शुरुआत में भगवान श्रीराम और वानर सेना हनुमान के लंका से लौटकर आने का इंतजार कर रही थी। लंका दहन के बाद हनुमान वापस आए और उन्होंने भगवान श्रीराम को माता सीता के सही सलामत होने में सूचना दी। हनुमान जी ने माता सीता की ओर से निशानी के तौर पर दिए गए जुड़े को भगवान राम को सौंप दिया। मंचन में दूसरा दृश्य समुद्र को पार करने का था। इस दौरान भगवान श्रीराम ने गुस्से में आकर समुद्र को नष्ट करने की ठानी। इसके बाद समुद्र देव प्रकट हुए और भगवान राम से क्षमा मांगी। समुद्र को पार करने के लिए श्रीराम नाम के पत्थरों को वानर सेना ने समुद्र में डाला। तीसरा दृश्य अंगद का गुप्तचर बनकर लंका पहुंचना और रावण को समझाना था। अगले दृश्य में रावण के भाई विभीषण ने अपने भाई को सलाह दी कि माता सीता को सकुशल भगवान श्रीराम के पास छोड़ आए। इसके बाद रावण आग बबूला हो गया और उसने विभीषण को लंका से बाहर कर दिया। 5वें दृश्य में रावण पुत्र मेघनाद और लक्ष्मण के बीच युद्ध होता है, जो काफी देर तक चलता है। इसी दौरान मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति का प्रयोग करके लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। जैसे ही भगवान श्रीराम को यह खबर मिली तो वह विलाप करने लगे। लक्ष्मण को जीवित करने के लिए सुशैन वैद्य को बुलाया गया। उन्होंने लक्ष्मण को जीवित करने के लिए संजीवनी बूटी लाने को कहा। इसके बाद हनुमान हिमालय में जाकर सूर्य उदय होने से पहले ही संजीवनी बूटी ले आते हैं। इसके बाद लक्ष्मण जी का उपचार होता है। इसके बाद लक्ष्मण को होश आ जाता है।