कठुआ। जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे सक्ता चक में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। बुधवार को कथा के पांचवें दिन साध्वी निष्कंप चेतना गिरी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को ईश्वर से निष्काम भाव से प्रेम करने का ज्ञान दिया।
उन्होंने कहा कि जब हम निश्चल भाव से प्रभु से अपनी प्रीत लगाते हैं तो हमें उन्हीं का सानिध्य प्राप्त होता है, जो हमारे जीवन को सार्थक बना सकता है।
कथा व्यास ने भगवान कृष्ण के गोकुल छोड़कर मथुरा जाने का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भगवान ने गोकुल से प्रस्थान किया तो गोपियों ने उनका मार्ग रोक लिया लेकिन जैसे ही उन्हें भगवान के स्वयं मथुरा जाने के निर्णय के बारे में पता चला। उन्होंने भगवान के मार्ग को छोड़ दिया, जोकि भगवान के प्रति उनके सच्चे प्रेम का सबूत है। क्योंकि प्रियतम के सुख को ही अपना सुख मानना सच्चा प्रेम है। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध किया और धर्म की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा पुराण भक्ति ज्ञान वैराग्य और त्याग का नमूना है, जो हमारे इस लोक के जीवन के साथ-साथ परलोक को भी मंगल बनाने वाला है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने मात्र से जीव धन्य हो जाता है लेकिन हमें परमात्मा की प्राप्ति के लिए काम, क्रोध, मोह और लोभ को त्याग कर निश्चल भाव से गोविंद के चरणों से प्रेम करना होगा, जैसा गोपियों ने किया।