कठुआ। शहर के आर्य समाज मंदिर में सावन मास की अमृत कथा का आयोजन जारी है। वीरवार को आयोजित कथा के दौरान नारायण जी ने भक्तों को अपने जीवन में मानवता को सर्वोच्च स्थान देने के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि मानवता की सेवा ही सच्चे अर्थ में ईश्वर की सेवा है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के अमेरिका प्रवास का उदाहरण रखते हुए कहा कि स्वामी जी से वहां जब किसी ने कहा कि कृपया आप मुझे अपने हिंदू धर्म में दीक्षित करने की कृपा करें। तब स्वामी जी ने कहा कि वह यहां हिंदू धर्म के प्रचार के लिए आए हैं, न कि धर्म-परिवर्तन के लिए। उन्होंने कहा कि वह अमेरिका के धर्म-प्रचारकों को यह संदेश देने आए हैं कि वे अपने धर्म-परिवर्तन के अभियान को सदैव के लिए बंद करके प्रत्येक धर्म के लोगों को बेहतर इंसान बनाने का प्रयास करें। इसी में हर धर्म की सार्थकता है।
वर्तमान में हमने मानवता को भुलाकर अपने को जाति-धर्म, गरीब-अमीर जैसे कई बंधनों में बांध लिया है और उस ईश्वर को अलग-अलग बांट दिया है। धर्म एक पवित्र अनुष्ठान भर है, जिससे चेतना का शुद्धिकरण होता है। धर्म मनुष्य में मानवीय गुणों के विचार का स्रोत है, जिसके आचरण से वह अपने जीवन को चरितार्थ कर पाता है। मानवता के लिए न तो पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता होती है और न ही भावना की, बल्कि सेवा भाव तो मनुष्य के आचरण में होना चाहिए।