कठुआ। शहर के वार्ड 17 में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। कथा के पांचवें दिन श्रीकृष्ण के जन्म पर सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई। इसके दर्शन पाने के लिए वहां मौजूद भक्तों में भारी उत्साह देखा गया। इस दौरान भक्तों ने पुष्पवर्षा कर भगवान की झांकी का स्वागत किया।
कथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो पूरे पंडाल ने नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारे लगाए। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी पर श्रद्धालुओं ने अपने- अपने घरों से लाए गए माखन और मिश्री से भगवान श्रीकृष्ण को भोग लगाया और उनका आशीष प्राप्त किया।
कथावाचक अश्विनी शास्त्री ने कहा कि जब धरती पर चारों ओर अनाचार और अत्याचार फैलता है तो भगवान का अवतार अवश्य होता है। प्रभु किसी न किसी रूप में दुर्जनों का विनाश करने स्वयं आते हैं। वह त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बनकर आए तो द्वापर में कृष्ण बनकर अवतरित हुए। राम का जीवन मर्यादा पुरुषोत्तम का है, जबकि कृष्ण लीलाधारी हैं। मानव को राम के आचरण को अपनाना चाहिए और कृष्ण के बताए गए आदर्शों पर चलना चाहिए। ईश्वर की भक्ति एक बहती हुई नदी के समान है, जिसमें भक्त चाहे तो स्नान करे, उसका आचमन करे और चाहे तो किनारे खड़े होकर उसका आनंद ले। तीनों रूपों में उसका कल्याण होगा।
उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के बालरूप का वर्णन करते हुए कहा कि नंद बाबा के घर दूध व माखन होते हुए भी कृष्ण गोपियों के घर इसलिए चोरी करते थे, जिससे गोपियां चोरी छिपे कृष्ण का दर्शन कर सकें। ऐसा करके लीलाधारी कृष्ण अपने भक्तों के बीच पहुंचते थे।