कठुआ। बनी-बसोहली मार्ग पर सूखा नाले में मलबा आने से तीन जिंदगियां दांव पर लग गईं। बनी उपजिला अस्पताल से बसोहली के लिए आपात स्थिति में रेफर की गई महिला ने प्रसव पीड़ा से तड़पते हुए 102 एंबुलेंस में ही एक बच्चे को जन्म दे दिया, जबकि दूसरे बच्चे का जन्म बसोहली उपजिला अस्पताल में पहुंचकर हुआ।
मामले में हैरान करने वाली लापरवाही भी सामने आई है कि एंबुलेंस में चालक और पीड़ित महिला के साथ तीमारदारों के अलावा कोई भी प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं था। ऐसा तब है, जबकि 108 एंबुलेंस सेवा भी बनी में मौजूद है और वीआईपी दौरे के चलते उसे बनी में ही रखा गया था।
दरअसल उपजिला अस्पताल बनी में महिला रोग विशेषज्ञ का पद खाली है। ऐसे में जटिल मामलों को तत्काल बसोहली या फिर कठुआ रेफर कर दिया जाता है। प्रसूता के पति राजिंद्र सिंह ने बताया कि वे बाड़ी डुग्गन के रहने वाले हैं और प्रसव पीड़ा के चलते वीरवार सुबह साढ़े तीन बजे के लगभग उन्होंने अपनी पत्नी को सीएचसी बनी में भर्ती करवाया लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें दो बच्चे होने के चलते प्रसव में जटिलता का हवाला देते हुए रेफर कर दिया। एंबुलेंस बनी से शीतलनगर के बीच सूखा नाला के पास पहुंची तो पता चला कि मलबा चलने से रास्ता बंद हो गया है। ऐसे में उनकी पत्नी की प्रसव पीड़ा भी बढ़ गई। इसके बाद उनकी पत्नी ने एंबुलेंस में ही एक बच्चे को जन्म दे दिया, जबकि दूसरा बच्चा अस्पताल में हुआ। केवल उनकी बुआ उनके साथ गाड़ी में मौजूद थीं। एंबुलेंस चालक ने ब्लेड उपलब्ध करवाया। राजिंद्र ने बताया कि फिलहाल बच्चे और मां दोनों खतरे से बाहर हैं।
बीएमओ बनी डॉ. देवराज मिश्रा ने बताया कि बनी उपजिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ-साथ स्टाफ की भी भारी कमी है। ऐसे में हर एंबुलेंस के साथ स्टाफ भेज पाना मुनासिब नहीं है। उन्होंने बताया कि 108 एंबुलेंस सेवा को वीवीआईपी दौरे के चलते बनी में ही रखा गया था।