भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास से देश के दुश्मनों को ललकारते हुए नमो आत्मविश्वास से लबरेज दिखे।
शहीदों की नगरी के रूप में विख्यात इस कस्बे से भारत विजय रैली की शुरुआत कर मोदी ने अपनी चुनावी रणनीति को साफ किया।
जातीय समीकरण साधने की बाजीगरी भी उन्हें भाने लगी है। यही कारण है कि नमो अब पिछड़ों को न्याय का मुद्दा भी जोरशोर से उठाते हैं।
मोदी ने पिछड़ों के साथ न्याय और उन्हें अधिकार देने की बात कर नया समीकरण गढ़ने की कोशिश की।
उन्होंने गुज्जरों और पिछड़ों को ताकत देने की बात कही।
खुद को चाय वाला बताकर गरीबों से आत्मीय रिश्ते का भी जिक्र किया। अपनी हर बात पर जनता से सीधा संवाद कर मुहर भी लगवाते रहे।